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मप्र की सडक़ों पर दौड़ रहे लाखों वाहनों में उच्च सुरक्षा नंबर प्लेट नहीं
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सख्ती के अभाव में धीमा पड़ा वाहनों पर एचएसआरपी अभियान
भोपाल। मध्यप्रदेश में पंजीकृत वाहनों में उच्च सुरक्षा पंजीयन नंबर प्लेट (एचएसआरपी) लगवाने के लिए एक साल पहले जो अभियान शुरू हुआ था, उससे एचएसआरपी बनाने वाली की अधिकृत एजेंसियों पर तो दबाव बढ़ा ही, वाहन डीलरों के यहां भी एचएसआरपी लगवाने वालों की लाइनें लग गई थीं। लेकिन प्रशासनिक सख्ती कम होते ही पुराने वाहनों में एचएसआरपी लगवाने वालों की संख्या 10 गुना तक कम हो गई है। एचएसआरपी पंजीयन के बाद प्लेट लगवाने की प्रतिक्षा अवधि भी एक महीने से घटकर अधिकतम एक सप्ताह रह गई है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगवाने के लिए 31 दिसंबर 2022 को डेडलाइन जारी की थी। इसमें मोटर व्हीकल एक्ट के तहत एक अप्रैल 2019 से पहले रजिस्टर्ड हुए सभी दुपहिया वाहनों पर एचएसआरपी एवं चार पहिया वाहनों पर एचएसआरपी और कलर कोडेड स्टीकर लगाया जाना अनिवार्य किया था। इस अवधि के बाद बिना एचएसआरपी वाहन पकड़े जाने पर बड़े अर्थदण्ड के निर्देश भी जारी किए थे। इसके बाद से बिना एचएसआरपी नंबर के लिए एजेंसियों पर वाहन मालिकों की भीड़ लग गई थी। वहीं एचएसआरपी के ऑनलाइन पंजीयन के बाद एजेंसी पर पहुंचकर प्लेट लगवाने की प्रतिक्षा सूची भी एक महीने तक की हो गई थी। कार्रवाई की तिथि निकलने के बाद भी बिना एचएसआरपी वाले वाहनों पर शासन-प्रशासन की सख्ती नहीं दिखी तो दूसरे वाहन चालकों ने भी लापरवाही की और अब उच्च सुरक्षा नंबर प्लेट लगवाने वालों की संख्या घटकर एक चौथाई से भी कम हो गई है।
वाहनों पर एचएसआरपी क्यों जरूरी
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट में सीक्रेट कोड होता है, इससे वाहन और मालिक की पहचान करना आसान होता है। एचएसआरपी नंबर 200 मीटर की दूरी से आंखों से पढ़े जा सकते हैं और सीसीटीवी कैमरे में भी आसानी देखे जा सकते हैं। इसलिए परिवहन नियमों का उल्लंघन अथवा अपराधिक घटना में नंबर से वाहन की पहचान में आसानी होती है। अलग-अलग 9 श्रेणियों के वाहनों में एचएसआरपी को रंग और आकार भी अलग-अलग दिए गए हैं। एचएसआरपी नंबर प्लेट नहीं लगवाने पर नियमानुसार पांच हजार से 10 हजार रुपये तक के अर्थदण्ड का प्रावधान है।
भोपाल में गुमटी कारोबारी बना रहे नकली एचएसआरपी
राजधानी के एमपी नगर क्षेत्र में स्थित गुमटियों में नकली एचएसआरपी नंबर प्लेट बनाई जा रही हैं। एमपी नगर जोन-1 में वाहनों की अलग-अलग रंग-आकार की नंबर प्लेट बनाने वालों की करीब दो दर्जन दुकानें हैं। यहां वाहनों में हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठेका भी लिया जाता है। ग्राहकों को एचएसआरपी के लिए दो-तीन दिन का समय दिया जाता है, जो एमपी नगर में ही दो-तीन ठिकानों पर गुप्त रूप से तैयार होती हैं। नकली एचएसआरपी में वाहन नंबर का फोण्ट, आकार और रंग सहित प्लेट एचएसआरपी जैसी ही नजर आती है। लेकिन इसमें यूनिक लेजर टेक्टिनिक सीरियल नंबर नहीं होता है। इसके अलावा आईएनडी अर्थात इंटरनेशनल रजिस्ट्रेशन कोड फॉर इंडिया और हॉट स्टेम्प्ड क्रॉमियम आधारित अशोक चक्र प्रतीक भी नकली होता है।
‘एचएसआरपी के बिना वाहन से संबंधित फिटनेस, परमिट, रिन्युअल, ट्रांसफर जैसा कोई काम परिवहन विभाग में नहीं होगा। इसलिए एचएसआरपी जल्द से जल्द सभी को लगवा लेनी चाहिए। 2019 के बाद जिन वाहन डीलरों ने एचएसआरपी लगाकर भी पोर्टल पर डेटा फीड नहीं किया था, उन्हें एक माह में करना है। अन्यथा उनके डीलर लायसेंस निरस्त किए जाएंगे।’
विवेक शर्मा, परिवहन आयुक्त, मप्र
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