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खनिज चोर ठेकेदारों पर नकेल कसेगी सरकार
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तकनीकी अपनाएगा मप्र खनिज विभाग
भोपाल। शासकीय भूमि पर खनिज पट्टा कराकर निर्धारित सीमा से अधिक खनिज चुराने वाले ठेकेदारों पर सरकार नकेल कसने जा रही है। अनुमति से अधिक भूमि अथवा मानकों से अधिक गहरे गड्ढे कर खनिज चोरी करने वाले ठेकेदारों पर कार्यवाही के साथ-साथ सरकार उनसे मोटा अर्थदण्ड वसूलने की तैयारी भी कर रही है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में 31 प्रकार के गौण खनिजों में से रेत, चूना पत्थर, डोलोमाइट, मुरम आदि गौण खनिज प्रचुर मात्रा में हैं। इसके अलावा क्रेसर आधारित काले पत्थर आदि खनिजों का कारोबार भी बड़ी मात्रा में होता है। खनिज ठेकेदार स्वीकृत खनिज भूमि क्षेत्र से बाहर जाकर खनन कारोबार करते पाए गए हैं, विगत वर्षों में भूमि का सीमांकन विधिवत और तकनीकी रूप से नहीं होने के कारण इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती थी। लेकिन जियो टेगिंग के बाद प्रत्येक खनन क्षेत्र एवं खदानों का सीमांकन कर सीमाएं निर्धारित की गई हैं। अब कोई भी खनिज ठेकेदार आवंटित क्षेत्र से बाहर खनिज उत्खनन करता है तो न केवल उस अतिरिक्त क्षेत्र की माप की जा सकेगी, बल्कि खनिज की उत्खनित मात्रा को भी मापा जा सकेगा। इससे शासन की बड़ी राजस्व चोरी को रोका जा सकेगा।
मात्रा से अधिक खनन कैसे आंकेगा विभाग
मध्यप्रदेश में अवैध खनन एवं भण्डारण रोकने के लिए खनिज साधन विभाग भू-स्थानिक (जियो-स्पेटियल) प्रौद्योगिकी का उपयोग कर खनिज निगरानी प्रणाली विकसित कर रहा है। इसके तहत अब तक की सभी 7502 खदानों को जियो टेग कर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया जा चुका है। उपग्रह चित्र एवं रिमांट सेंसिंग तकनीकी के सहयोग से प्रदेश में अवैध उत्खनन और भण्डारण पर निगरानी रखी जाएगी। निगरानी प्रणाली तंत्र द्वारा इस तकनीकी से स्वीकृत खदान क्षेत्र से बाहर होने वाला अवैध उत्खनन का पता लगाया जा सकेगा। तंत्र इस संबंध में शासन और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट भेजेगा। क्षेत्रीय अमला मोबाइल एप के माध्यम से परीक्षण एवं निरीक्षण कर रिपोर्ट पोर्टल/मोबाइल एक पर दर्ज कर प्रकरण पंजीबद्ध करेगा। जरूरत पडऩे पर खदान या उसके बाहर ड्रोन सर्वे करवाकर वॉल्यूमेट्रिक विश्लेषण कर वास्तविक उत्खनित मात्रा का पता लगाकर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही कर अर्थदण्ड भी अधिरोपित किया जा सकेगा। हालांकि यह सम्पूर्ण परियोजना अभी प्रक्रियाधीन है।
मध्यप्रदेश में खनिजों के अवैध परिवहन को रोकने के लिए नवीन तकनीकी आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित द्वार बनाया जाना प्रस्तावित है।
ग्वालियर में लगा 425 करोड़ का जुर्माना
आवंटित खनन क्षेत्र की सीमा से बाहर जाकर अरबों रुपये का खनिज चुराने वाले मप्र के 23 खनिज ठेकेदारों पर अब तक का संभवत: सबसे बड़ा 425 करोड़ रुपये का जुर्माना सितम्बर 2017 में ग्वालियर जिले के बिलौआ- रफादपुर खनन क्षेत्र में तत्कालीन कलेक्टर संजय गोयल ने लगाया गया था। इनमें कुछ ठेकेदार ऐसे भी थे, जिन पर अर्थदण्ड की राशि सौ करोड़ से अधिक थी। कलेक्टर न्यायालय में विचाराधीन इन प्रकरणों में से 6 में तत्कालीन ग्वालियर कलेक्टर कौशलेेन्द्र विक्रम सिंह ने 60.23 करोड़ का अर्थदण्ड भी अधिरोपित किया था। हालांकि इस प्रकरण में अब तक शासन प्रशासन वसूली नहीं कर सका है।
राजस्व लक्ष्य में इस बार पिछड़ा विभाग
देश में चौथा सबसे बड़ा खनिज सम्पन्न राज्य होने का दावा करने वाला मप्र का खनिज साधन विभाग ज्यादा से ज्यादा खनिज दोहन एवं राजस्व बढ़ाने के लिए कई नई तकनीकी का उपयोग कर रहा है। विगत वर्षों में शासन से मिले लक्ष्यों को भी विभाग पूरा करता रहा है। लेकिन पिछले वर्ष खनिज विभाग राजस्व प्राप्ति में सबसे ज्यादा पिछड़ा। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए विभाग को शासन से 12500 करोड़ के राजस्व संग्रहण का लक्ष्य मिला था, लेकिन दिसम्बर 2024 तक विभाग कुल 6809.58 करोड़ राजस्व ही जुटा सका। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में 9500 करोड़ के लक्ष्य के विपरीत 10065 करोड़ रुपये राजस्व संग्रहित किया था।
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