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सौरभ के परिजनों को कैसे मिली जमानत, हो रही गुप्त पड़ताल
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ईडी मामले में उच्च न्यायालय से सौरभ की जमानत के प्रयास
भोपाल। भोपाल विशेष न्यायालय से जमानत खारिज हो जाने के बाद परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की उच्च न्यायालय से जमानत के लिए उसके परिजन लगातार प्रयास कर रहे हैं। जबकि ईडी द्वारा दर्ज प्रकरण में ही सह आरोपी सौरभ की माँ उमा शर्मा, पत्नी दिव्या तिवारी, साले रोहित तिवारी और मौसेरे जीजा विनय हासवानी को गिरफ्तारी से पहले ही बड़ी आसानी से मिली जमानत की गुप्त पड़ताल भी शुरू हो गई है। शासन स्तर से गुप्त रूप से यह पता लगाया जा रहा है कि ईडी प्रकरण में मिली जमानत का आधार क्या था। जमानत के दौरान न्यायालय में शासन के वकीलों और जांच एजेंसी के अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि सौ करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्तियों के मालिक परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके दोनों साथियों चेतन गौर और शरद जायसवाल को लोकायुक्त प्रकरण में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण) से जमानत मिल चुकी है। इसके बाद सौरभ और शरद के परिजनों ने विशेष न्यायालय (प्रवर्तन निदेशालय) में भी नामी वकीलों को खड़ा कर जमानत का प्रयास किया था। चूंकि यह हाईप्रोफाइल एवं भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर प्रकरण है, इसलिए भोपाल जिला न्यायालय ने विगत 24 अप्रैल को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सौरभ के परिजनों ने जबलपुर उच्च न्यायालय में जमानत याचिका लगाई है।
आरोप पत्र पेश होते ही परिजनों को मिली जमानत
सौरभ शर्मा, चेतन गौर, शरद जायसवाल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने 8 अप्रैल को न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। इस आरोप पत्र में सौरभ की काली कमाई के सहभागीय सौरभ के परिजनों, रिस्तेदारों, दोस्तों और इनसे जुड़ी फर्मों, कंपनियों और संस्थाओं सहित कुल 12 को आरोपी बनाया गया। खास बात यह है कि आरोप पत्र में नाम आते ही 11 अप्रैल को सौरभ की माँ, पत्नी, साले और मौसेरे जीजा ने न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन लगाया और 12 अप्रैल को 18वें अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष के न्यायालय से चारों को 10-10 लाख रुपये के बॉण्ड पर जमानत मिल गई थी। शासन स्तर से गुप्तरूप से यह पता किया जा रहा है कि इन सह आरोपियों को इतनी जल्दी और आसानी से जमानत मिलने का आधार क्या रहा। जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान शासन के वकीलों और जांच एजेंसी ईडी की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई अथवा नहीं। यदि दर्ज कराई गई तो का वह न्यायालय के विचार योग्य प्रभावी थी।
फर्म-संस्थाओं को जमानत अभी नहीं
प्रवर्तन निदेशालय ने सौरभ की संपत्तियों से संचालित जिन फर्मों, संस्थाओं और कंपनियों को आरोपी बनाया है, उसके संचालक और पदाधिकारी प्रकरण के आरोपी हैं। जयपुरिया स्कूल की स्थानीय समिति की अध्यक्ष के रूप में उमा शर्मा, डायरेक्टर दिव्या तिवारी तथा अलग-अलग कंपनियों और फर्मों में डायरेक्टर के रूप में भी रोहित तिवारी, विनय हासवानी, आरोपी प्यारे केवट सहित अन्य को अलग से आरोपी बनाया गया है। संस्था अथवा कंपनी पदाधिकारी के रूप में इन्हें फिर से जमानत आवेदन करना होगा।
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