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मप्र में थमे प्रवर्तन निदेशालय के छापे और कार्यवाहियां
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मार्च में हर तीन दिन में कार्यवाही का अनुपात, अब डेढ़ माह में सिर्फ एक
भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इन दिनों देशभर में लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू सहित अन्य एजेंसियों द्वारा मारे गए छापों में मिली अनुपातहीन और आय से अधिक संपत्तियों एवं शासकीय राशि के गबन जैसे मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर लगातार कार्यवाही कर रही है। विगत महीनों में मप्र में भी ईडी की कार्यवाहियां तेजी से शुरू हुई थीं। इसी साल मार्च महीने में ईडी ने अनुपातिक रूप में हर तीसरे दिन एक कार्यवाही की। लेकिन अब विगत डेढ़ महीने में विगत 9 मार्च के बाद सिर्फ एक कार्यवाही विगत 28 अप्रैल को शराब ठेकेदारों के भोपाल, इंदौर मंदसौर आदि शहरों में सर्च की सर्च एवं कुर्की की कार्यवाही हो सकी थी। इसके बाद से ईडी ने भोपाल सहित प्रदेशभर में एक भी कार्यवाही नहीं की है।
उल्लेखनीय है कि मप्र में प्रवर्तन निदेशालय की अंतिम कार्यवाही विगत 28 फरवरी को शराब कारोबारियों के इंदौर, भोपाल और रतलाम आदि शहरों में छापे के रूप में हुई थी। इसके पहले प्रवर्तन निदेशालय, जोनल ऑफिस भोपाल द्वारा 9 अप्रैल को परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा एवं अन्य के विरुद्ध विशेष न्यायालय (पीएमएलए) भोपाल के समक्ष अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर कराए जाने के रूप में हुई थी। हालांकि मार्च महीने में प्रवर्तन निदेशालय ने सर्च छापे, कुर्की-जब्ती सहित 10 कार्रवाईयां की थीं।
ईडी के कारण ही सौरभ पर कसा शिकंजा
परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के यहां लोकायुक्त और ईडी के छापों में 52 किलो सोना, 235 किलो चांदी, 11 करोड़ नकदी सहित कुल सौ करोड़ से अधिक की संपत्ति मिलने के बाद ईडी ने सौरभ, उसके परिजनों, दोस्तों और उसकी कंपनियों के संचालकों के यहां छापे मारे थे। चेतन की कार से मिले सोने और नकदी को सबसे पहले ईडी ने ही सौरभ की संपत्ति माना और उसे कुर्क किए जाने का आवेदन न्यायालय में दिया था। इसके बाद आयकर ने भी सोना और नकदी को सौरभ का माना। लोकायुक्त मामले में सौरभ और उसके दोनों दोस्तों चेतन और शरद की जमानत हो चुकी है, लेकिन ईडी मामले में इन्हें अब तक उच्च न्यायालय तक से राहत नहीं मिल सकी है। इस प्रकरण में ईडी के शामिल होने से ही परिवहन विभाग के इस वसूली माफिया पर शिकंजा कस सका है।
अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद धीमी हुई कार्रवाई
सौरभ शर्मा सहित अन्य मामलों की पड़ताल और कार्यवाही के बीच तीन महीने पहले फरवरी में भोपाल में ईडी के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर तुषार श्रीवास्तव और रीतेश श्रीवास्तव का दिल्ली स्थानांतरण हो गया था। मुकेश कुमार को भोपाल जोनल ऑफिस में डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया था। इसके बाद मार्च महीने तक ईडी की कार्रवाईयां तेजी से हुईं, लेकिन अप्रैल और मई महीनों में ईडी मप्र में पहले की तरह सक्रिय नजर नहीं आ रही है।
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