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अटकी विकास योजनाओं को गति देगा 4 गुना मुआवजे का फैसला, मुख्यमंत्री बोले-किसान परिवारों की आत्मनिर्भरता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम
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भोपाल। केन्द्र और राज्य सरकार की कई लंबित, प्रस्तावित और भावी योजनाएं अब भूमि अधिग्रहण के फेर में अटकेंगी नहीं। प्रदेश में औद्योगिक एवं अधोसंरचना विकास की दृष्टि से एवं किसान परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ही अधिग्रहित की जाने वाली किसान की भूमि के लिए उसे चार गुना मुआवजा देने का निर्णय लिया है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित पत्रकारवार्ता में कही। इस दौरान उनके साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, विधायक हेमंत खंडेलवाल, एसीएस नीरज मंडलोई, जनसंपर्क आयुक्त मनीष सिंह, भाजपा के प्रदेश प्रभारी आशीष अग्रवाल उपस्थित रहे।
शहर की भूमि का दो गुना, गांव में 4 गुना मुआवजा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि चूंकि शहरी क्षेत्र की भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन पहले से अधिक होती है। इसलिए इस भूमि का मुआवजा उसकी कीमत का दो गुना ही दिया जाएगा। जबकि ग्रामीण क्षेत्र की भूमि के लिए सरकार चार गुना मुआवजा देगी।
न्यायालयों से मुक्त होंगे कई प्रकरण
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित भूमि पर अपेक्षाकृत दो गुना मुआवजे से किसान संतुष्ट नहीं होते थे। कई किसान अधिक मुआवजे की मांग को लेकर न्यायालय की शरण में चले जाते थे। अब सरकार ने उनकी भूमि का मुआवजा 4 गुना तय किया है, तो न्यायालय में लंबित अधिकांश प्रकरणों के खात्मे की भी संभावना है।
जिन्हें कम मिला, वे कर सकेंगे अपील
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जिन किसानों के प्रकरणों का निपटारा पूर्व की नीति के हिसाब से 2 गुना मुआवजा राशि के साथ हुआ है। वे तहसीलदार से लेकर आयुक्त तक और आगे भी अपील कर सकेंगे। वहीं जिनके भी प्रकरण अब तक लंबित हैं, उन सभी को सरकार उनकी भूमि का चार गुना मुआवजा देगी। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि चार गुना किए जाने का निर्णय 13 नवम्बर 2026 को गठित उच्च स्तरीय मंत्रिमंडलीय समिति की द्वारा 400 से अधिक हितबद्ध पक्षकारों, किसान संगठनों, सामाजिक संगठनों तथा क्रेडाई व फिक्की सहित अन्य संस्थाओं से व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया।
पर्याप्त भण्डार, निर्यात कम फिर भी खरीद रहे किसान का गेँहू
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मप्र से गेँहू का निर्यात न के बराबर है। गोदामों में पर्याप्त भण्डारण भी है। फिर भी सरकार 2650 रुपये समर्थन मूल्य पर किसानों से गेँहू खरीद रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वैश्विक कारणों से जूट के बैग उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं तो सरकार पॉलीथिन बैग से काम चला रही है। पहले छोटे और मध्यम किसानों का गेँहू खरीदा जा रहा है, इसके बाद बड़े किसानों का गेहँू खरीदेंगे। पिछले साल का भरा हुआ गेहँू चुनौती है, केन्द्र से 78 लाख टन गेँहू का कोटा मांगा है। उन्होंने कहा कि पांच साल में गेँहू की कीमत 2700 रुपये में खरीद का वादा पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3.30 लाख करोड़ के बजट को 4.68 लाख करोड़ तक लाए हैं। वह भी बिना कोई अतिरिक्त ‘कर’ लगाए। नीति आयोग के हिसाब से निर्धारित कर्ज लिया गया है। अब तक एक भी बार ओवर ड्राफ्ट नहीं किया है।
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