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इनके ठेंगे पर कानून! खाकी पर कौन करेगा चालान?
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यातायात जागरुकता पर हर साल करोड़ों खर्च कर रही सरकार, आमजन पर लगातार हो रही चालानी कार्रवाई
भोपाल। राजधानी सहित पूरे मध्यप्रदेश में यातायात नियमों के उल्लंघन पर थानों और यातायात पुलिस द्वारा लगातार चालानी कार्रवाई की जा रही है। राजधानी की सडक़ों से लेकर थानों और पुलिस मुख्यालय तक में प्रवेश कर रहे पुलिसकर्मी न तो मोटर साइकिल पर हेलमेट ही लगाते हैं और न ही आईपीएस अधिकारियों की कार चलाते ज्यादातर सरकारी अथवा निजी वाहन चालक सीट बेल्ट ही बांधते हैं। शहर में बैरीकेट्स लगाकर चालानी कार्रवाई करने वाली टीम इनकी तरफ देखने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। सवाल उठता है कि कानून सभी के लिए समान है तो इन्हें कानून के उल्लंघन की छूट क्यों? आखिर खाकी पहनकर नियम तोडऩे वालों पर कार्रवाई कौन करेगा?
निश्चित ही यातायात नियमों के पालन के पीछे सरकार और पुलिस का उद्देश्य वाहन चालकों और आमजन की सुरक्षा ही है। इसके लिए समय-समय पर यातायात जागरुकता के अभियान चलाए जाते हैं। पुलिस जनजागरुकता सप्ताह और माह भी आयोजित करती है। मप्र में ही अलग-अलग शहरों में कई ऐसे दृष्य देखने को मिले हैं, जब सडक़ पर नियम तोडक़र दौड़ते वाहन चालकों को रोककर पुलिस ने गांधीगिरी दिखाई है। उन्हें गुलाब भेंट किए हैं। कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर चलाए गए अभियानों में बिना हेलमेट चलने वाले वाहन चालकों का चालान नहीं किया बल्कि उनसे कीमत की राशि लेकर हेलमेट पहनाए गए हैं। लेकिन अभियान सिर्फ तय तिथियों और जागरुकता के लिए शासन द्वारा दिए गए बजट के खर्च होने तक ही चलते हैं। यातायात नियमों को तोडऩे वालों पर सख्ती के लिए पुलिस को अंतत: चालानी कार्रवाई ही करनी पड़ती है।
शहर में कई प्रमुख चैकिंग स्थल
यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालानी कार्रवाई के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई करती है। इसके लिए शहर में कुछ प्रमुख स्थान चैकिंग स्थल के रूप में चिन्हित भी हो चुके हैं। मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने तिराहा, बोर्ड ऑफिस चौराहा, नानके पेट्रोल पंप मोड़, न्यू मार्केट तिराहा, हबीबगंज नाका रेलवे पुल के नीचे, भेल से आईएसबीटी मोड़, बिट्टन मार्केट पर एसबीआई के सामने, कालीमाता मंदिर चौराहा चूनाभट्टी, राजाभोज सेतु से व्हीआईपी मोड़ सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर अक्सर यातायात पुलिस की चैकिंग देखी जा सकती है। चालानी कार्रवाई में फंस चुके और अक्सर निकलने वाले वाहन चालक बचकर और रास्ता बदलकर निकलने का प्रयास करते हैं।
वर्दी में पुलिसकर्मी तो जरूरी नहीं हेलमेट !
शहर में पुलिस की वाहन चेकिंग के बीच बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन पर सवार पुलिस कर्मियों को बेरोकटोक निकलते देखा जा सकता है। चेकिंग कर रहे पुलिसकर्मी इन्हें रोकते भी नहीं हैं। पुलिस गणवेश में नहीं होने पर अगर किसी पुलिसकर्मी को रोका भी जाता है तो स्टाफ या पहचान बताने पर बिना चालान किए ही छोड़ दिया जाता है।
सीटबेल्ट नहीं पहनते अधिकारियों के वाहन चालक
राजधानी में पुलिस अथवा प्रशासन के वरिष्ठतम अधिकारियों के वाहनों को चलाने वाले अधिकांश सरकारी अथवा निजी वाहन चालक सीटबेल्ट नहीं बांधते। कार में पीछे की सीट पर बैठे ज्यादातर अधिकारियों को भी इससे मतलब नहीं होता है। पुलिस अथवा प्रशासन के नंबरों वाली गाड़ी तो शहर में रोकी ही नहीं जातीं। प्रायवेट तथा निजी नंबर वाली गाडिय़ां जिनमें अधिकारी सवार होते हैं, उनके चालान की हिम्मत यातायात पुलिसकर्मी नहीं जुटा पाते हैं।
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