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कलेक्टर के आदेश को धता बता रहे ई-रिक्शा चालक
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- स्कूलों के बाहर से छात्रों को बना रहे सवारी
भोपाल। ई-रिक्शा में स्कूली छात्र-छात्राओं के परिवहन को लेकर कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह द्वारा 20 जुलाई को जारी किए गए प्रतिबंधात्मक आदेश का शहर में पालन नहीं हो पा रहा है। पुलिस और प्रशासन की अनदेखी के चलते सुबह स्कूल खुलने से पहले और दोपहर में छुट्टी के बाद सडक़ों पर छात्र-छात्राओं से भरे ई-रिक्शा नजर आ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि जिला सडक़ सुरक्षा समिति, भोपाल की 27 जून को हुई बैठक में ई-रिक्शा से स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिता जताई गई थी एवं छात्र-छात्राओं के परिवहन के एि ई-रिक्शा को असुरक्षित वाहन माना। सडक़ सुरक्षा समिति द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर ही भोपाल कलेक्टर ने ई-रिक्शा से स्कूली छात्र-छात्राओं के परिवहन पर प्रतिबंध लगाया था। आदेश के उल्लंघन पर कार्रवाई की बात भी कही गई थी।
प्रशासन, पुलिस न ही परिवहन विभाग को चिंता
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश की प्रति जिला शिक्षा अधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, पुलिस आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को संलग्न किया गया था। इन विभागों को छात्र-छात्राओं का परिवहन करने वाले ई-रिक्शा चालकों पर कार्रवाई करनी थी। लेकिन विगत तीन दिनों में सडक़ों पर छात्र-छात्राओं का परिवहन करते ई-रिक्शा चालकों पर न तो शिक्षा विभाग की ही नजर गई है और न ही पुलिस, प्रशासन और परिवहन विभाग को यह नजर आए हैं। कार्रवाई के संबंध में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी जितेन्द्र शर्मा से मोबाइल पर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
छुट्टी होते ही स्कूलों के बाहर खड़े हो जाते हैं ई-रिक्शा
राजधानी के कई स्कूलों के छात्र-छात्राएं निजी और सार्वजनिक वाहनों से विद्यालय और घर वापस पहुंचते हैं। शहर के मुख्य मार्गों पर सिटी बसों की कमी के बाद से कई मार्गों पर ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा सार्वजनिक परिवहन के रूप में उपयोग हो रहे हैं। मातामंदिर, कोलार, नेहरू नगर, भारतमाता चौराहा आदि स्थानों से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, एमपी नगर जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों के 20 से 40 रुपये के हिसाब से सवारी बैठाई जा रही हैं। लेकिन सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-2 सहित अन्य विद्यालयों की छुट्टी होते ही कई ई-रिक्शा चालक विद्यालयों के सामने और 7 नंबर बस स्टॉप पर खड़े होकर छात्र-छात्राओं को बैठा रहे हैं।
‘आदेश के संबंध में शिक्षा विभाग को जिस तरह के आदेश मिलेंगे कार्यवाही की जाएगी। हालांकि वैधानिक कार्रवाई परिवहन विभाग को ही करनी है।’
नरेन्द्र कुमार अहिरवार
जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल
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