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युवकों में बढ़ रहे हैं कोलोरेक्टल कैंसर के मामले

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— समय रहते जांच और जागरूकता जरूरी
भोपाल। कोलोरेक्टल कैंसर, जो बड़ी आंत (कोलन या रेक्टम) को प्रभावित करता है, पहले यह केवल पश्चिमी देशों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब भारत में भी आधुनिक जीवनशैली के कारण इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर यह पुरुषों और महिलाओं में तीसरा सबसे आम बीमारी कैंसर है। यह विचार एम्स के ईडी डॉ. अजय सिंह ने व्यक्त किए। बता दें कि यह संस्थान जनस्वास्थ्य से जुड़े उभरते खतरों के प्रति जन-जागरूकता के साथ ही समय पर निदान एवं उपचार को लगातार बढ़ावा दे रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में यह हर साल 1 लाख में लगभग 4.4 लोगों को प्रभावित करता है। जोखिम कारकों में 50 वर्ष से अधिक आयु, पुरुष लिंग, पारिवारिक इतिहास, लिंच सिंड्रोम जैसी आनुवंशिक स्थितियां, कम फाइबरयुक्त आहार, मोटापा, धूम्रपान, अत्यधिक शराब सेवन और आंत की सूजन संबंधी बीमारियां शामिल हैं।
एम्स भोपाल में विशेष क्लनिक, प्रति सोमवार को ऑन्कोसर्जरी
इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए एम्स भोपाल में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग, गैस्ट्रोसर्जरी ओपीडी में प्रत्येक सोमवार को एक समर्पित जीआई ऑन्कोसर्जरी विशेष क्लिनिक संचालित करता है। विभाग इसोफेगस, पेट, पित्ताशय, बाइल डक्ट, अग्न्याशय, लिवर और बड़ी आंत के कैंसर से पीडि़त मरीजों की नियमित रूप से जांच करता है। कोलोरेक्टल कैंसर अब सिर्फ वृद्धों तक सीमित नहीं है। युवाओं में इसके बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। जनजागरूकता और समय पर जांच ही बचाव के सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।
 इस वजह से होता है कैंसर
विशेषज्ञों का कहना है कि मल में खून आने को बवासीर या फिशर समझकर खुद से दवा शुरू करना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर जांच कराने से इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।