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मध्यप्रदेश
237 खदान, उद्योगों की निरस्त होंगी पर्यावरणीय अनुमतियां!
मध्यप्रदेश
-सर्वोच्च न्यायालय, केंद्र और राज्य सरकार में मामला लंबित
भोपाल। मप्र में खदान समेत उद्योग एवं अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए पर्यावरण विभाग द्वारा नियम विरुद्ध दी गईं 237 पर्यावरणीय अनुमतियांं निरस्त हो सकती हैं। क्योंकि अनुमतियों से जुड़े मामले सर्वोच्च न्यायालय के अलावा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय और राज्य सरकार के पास लंबित हैं। स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) के चेयरमैन शिव नारायण सिंह चौहान ने विधिवत रूप से केंद्र एवं राज्य सरकार को नियम विरुद्ध अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।
दरअसल, सिया के पास पर्यावरणीय अनुमति के लिए आवेदन पहुंचते हैं। पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी और एप्को डायरेक्टर उमा माहेश्वरी ने पर्यावरण अनुमति के लिए आए 700 आवेदनों में 450 को अनुमति देने की प्रक्रिया में शामिल किया। इनमें से 237 आवेदनों को पर्यावरणीय मंजूरियां नियम विरुद्ध जारी कर दी थीं। जिनमें से करीब 200 अनुमतियां खदानों से संबंधित थीं। खास बात यह है कि पर्यावरण विभाग ने सिंहस्थ से जुड़े कार्यों की एक भी पर्यावरण अनुमतियां जारी नहीं की। सिया के चेयरमैन द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार को भेजी शिकायतों के अनुसार पर्यावरण अनुमति (ईसी) जारी करने का अधिकार सिर्फ भारत सरकार और सिया के पास है। इनके अलावा कोई इनवायरनमेंट क्लीयरेंस जारी नहीं कर सकती। जबकि पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी ने अपने स्तर पर 237 पर्यावरणी स्वीकृति जारी की थीं।
नियम विरुद्ध पर्यावरण अनुमतियां देने में गड़बड़ी का मामला दो महीने पहले 22 मई को सामने आया था। इसके अगले ही दिन एप्को की संचालक उमा माहेश्वर लंबे अवकाश पर चली गई थीं। तब एप्को संचालक का प्रभार जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त श्रीमन शुक्ला को दिया गया। शुक्ला ने 23 मई को ही प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी के अनुमोदन से पर्यावरणीय मंजूरी जारी कर दीं। बताया गया कि केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने आईएएस कोठारी और उमा माहेश्वरी के खिलाफ पहुंची शिकायत पर राज्य सरकार से अभिमत लिया गया है।
जांच हुई तो कार्रवाई तय
सिया चेयरमैन ने मुख्य सचिव को जो शिकायती भेजी हैं, उनके अनुसार यदि नियम विरुद्ध दी गई पर्यावरण अनुमतियों के मामले में जांच आगे बढ़ी तो फिर अनुमतियां निरस्त करनी पड़ सकती हैं। नियम विरुद्ध पर्यावरणीय अनुमति देने के मामले में 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। सरकार के नियमों में प्रावधान है कि 250 हेक्टेयर से अधिक की भूमि के मामले में पर्यावरणीय अनुमति केंद्र सरकार देगी और इससे कम 250 हेक्टेयर तक या इससे कम के मामलों में सिया ही अनुमति देगी। अगर सिया कमेटी नहीं है तो इस पर केंद्र सरकार ही परमिशन देगी।
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