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मध्यप्रदेश
अब हैडमास्टर और प्राचार्य भी बच्चों को पढ़ाएंगे रोज दो पीरियेड
मध्यप्रदेश
- स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश
भोपाल। प्रदेश में स्कूली शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसके तहत अब राज्य की समस्त प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के प्रधानाध्यापकों और समस्त हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को अपनी प्रशासनिक जिमेदारियों के साथ-साथ न्यूनतम दो पीरियड (कालखंड) में अनिवार्य रूप से शिक्षण कार्य करना होगा।
यह महत्वपूर्ण निर्णय राज्य स्तरीय परियोजना परीक्षण समिति की बैठक में लिया गया, जिसका उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार लाना है। अक्सर देखा गया है कि प्रशासनिक पदों पर आसीन होने के बाद स्कूल प्रमुखों का सीधा जुड़ाव शिक्षण से कम हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अब सभी प्रधानाध्यापक और प्राचार्य अपने विद्यालयों में नियमित रूप से कम से कम दो पीरियड में छात्रों को पढ़ाएंगे। यह सिर्फ औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि एक अनिवार्य शैक्षणिक गतिविधि होगी।
रिजल्ट के प्रति भी जवाबदेही तय : डीईओ
डीईओ नीरज अहिरवार ने बताया कि टाइम-टेबल में उन्हें अपने विषय के इन दो पीरियड्स को विद्यालय के समय विभाग चक्र में आवंटित करना होगा। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और शिक्षक व छात्र दोनों को पता होगा कि किस समय स्कूल प्रमुख शिक्षण कार्य कर रहे हैं। साथ ही यह जवाबदेही तय कर दी गई कि जिस कक्षा और विषय का अध्यापन प्रधानाध्यापक या प्राचार्य करेंगे, उसका परीक्षा परिणाम भी उन्हीं के नाम से दर्ज किया जाएगा। यानी, अब उनके प्रशासनिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके
शिक्षण कौशल का मूल्यांकन भी होगा।
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