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चार घंटे चर्चा के बाद 2335 करोड़ का अनुपूरक बजट पास

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शाम 6.50 तक चली अनुपूरक बजट पर चर्चा, कार्रवाई गुरूवार तक स्थगित 

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार की ओर से लाया गया 2335 करोड़ 36 लाख 80 हजार 998 करोड़ का अनुपूरक बजट बुधवार को सदन में लम्बी चर्चा के बाद सर्वसहमति से पास हो गया। चार घंटे की लम्बी चर्चा के बाद वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने अनुपूरक बजट प्रस्ताव रखा। विधेयक के खंडों पर विचार के बाद विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने अनुपूरक बजट पारित किए जाने की घोषणा की। 

अध्यक्ष ने दो घंटे बढ़ाया चर्चा का समय

अनुपूरक मांगों पर चर्चा हेतु निर्धारित 2 घंटे का समय शाम 5 बजे समाप्त हो जाने के बाद अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि अभी बोलने वाले सदस्यों की संख्या अधिक है। इसलिए उन्होंने वित्त विषयक कार्य पूरा होने तक सदन में समय वृद्धि किए जाने का आदेश दिया। उन्होंने सभी सदस्यों से भी आग्रह किया कि वे तीन-तीन मिनट में अपनी बात रखें। 

अनुपूरक मांगों पर इन विधायकों ने रखी बात 

उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष, ने कहा कि हर बार विधानसभा का सत्र छोटा कर दिया जाता है। सरकार चर्चा नहीं करना चाहती। इस सदन की मीटिंग चलाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन जब जनता की बात सुनने की बात आती है तो तो सरकार के पास सत्र चलाने का समय नहीं होता। सरकार अपने प्रचार के लिए हर साल 560 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। मतलब प्रतिदिन डेढ़ करोड़ रुपये प्रचार पर खर्च कर रही है, क्या यह कम है। 

अर्चना चिटनिस: अनुपूरक मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि 18 महीने की सरकार ने जो योजनाएं बनाई हैं। जो कुछ कहा,जो घोषणा की उसका कार्यान्वयन भी किया। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी और क्षेत्र की जनता की ऋणि हँॅू। किसको पार्टी छह बार चुनाव लडऩे का मौका देती है। विधायक भी मंत्री से छोटा नहीं होता, यह कुंठा मुझे कहीं नहीं है। 

ओंकार सिंह मरकाम: अनुपूरक मांगों के विरोध में बोलते हुए कहा, वित्तमंत्री ने मूल बजट में 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ मांगे थे। उसमें राजस्व आय 2 लाख 90 हजार 879 करोड़ थी। 5 हजार करोड़ ऋण मिला। राजकोषीय घाटा 78 हजार 902 करोड़ रुपये मूल बजट में रखा। हम 81 हजार करोड़ कर्जे की ओर बढ़ रहे हैं। विकास के लिए क्या दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर उद्योग चलाकर अधिकारी/कर्मचारियों से पैसे वसूले जा रहे हैं। 

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय: मांगों के समर्थन में बोलते हुए कहा, काम इतना हो रहा है, विपक्ष को दिखाई नहीं दे रहा। कोई विभाग या विभागीय योजना छोड़ी नहीं जा रही। अनावश्यक आरोप प्रत्यारोप लगाना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि बीच में अल्पकालीन सरकार (कांग्रेस) आई थी। समाचार छपे थे कि वरिष्ठ नेता के वरिष्ठ ओएसडी, वरिष्ठ पीए के यहां करोड़ों की संपत्ति पकड़ी गई। छापे पड़ गए। 

भंवर सिंह शेखावत ने विरोध में बोलते हुए कहा, आप जो पैसा मांग रहे हैं, हम चाहते हैं कि बताएं कि इस पैसे को कहां खर्च क रहे हैं। अस्पतालों की बिल्डिंग बना दी स्टाफ और मशीनरी नहीं है। स्कूलों की बिल्डिंगे गिर रहीं हैं। मेंटीनेंस का पैसा नहीं है। 

कमलेश्वर डोडियार ने विरोध में बोलते हुए कहा, रतलाम जिले में ढाई सौ से अधिक आंगनबाडिय़ों के भवन नहीं हैं। पेड़ के नीचे या झोंपड़ी में चल रही हैं। जनजातीय क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं।

फुंदेलाल मार्को ने अमरकंटक में प्राणी अभ्यारण्य बनाने और उसका नाम जामवंत अभ्यारण्य रखे जाने की बात कही। 

अनुपूरक मांगों पर इन्होंने भी रखी बात 

शैलेन्द्र जैन, श्रीमती झूमा सोलंकी, गौरव पारदी, महेश परमार, अनिरुद्ध माधव मारू, नारायण सिंह पट्टा, उमाकांत शर्मा, डॉ. हीरालाल अलावा, सिद्धार्थ तिवारी, सुरेश राजे, नीरज सिंह ठाकुर, कैलाश कुशवाहा, राजेश वर्मा, पंकज उपाध्याय, दिनेश गुर्जर, नितेन्द्र राठौर। 

ऋण को बजट से जोडऩा न्यायसंगत नहीं: देवड़ा 

सभी सदस्यों द्वारा अनुपूरक बजट के पक्ष/विपक्ष में विचार रखे जाने के बाद वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा, ने अपने संबोधन में कहा कि सभी सदस्योंं की भावना है कि हमारा प्रदेश आगे बढ़े, विकास हो, आलोचना करना प्रतिपक्ष का धर्म भी है। जनता चाह रही है तो हमने गांव-गांव, चौपाल-चौपाल जाकर काम किए हैं। ऋण से बजट को जोड़ा जाना न्यायसंगत नहीं है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रही सरकार में सारे क्षेत्रों में प्रदेश निरंतर प्रगति पर है। उन्होंने अनुपूरक बजट को सर्वसम्मति से पास किए जाने का आग्रह सदस्यों से किया। 

पटल पर रखे गए प्रतिवेदन

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड का 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के वर्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखें। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-24 और मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा संपरिक्षक प्रतिवेदन 2024-25 पटल पर रखे। वहीं मंत्री प्रदयूएम सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना और मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत कम वितरण कंपनी लिमिटेड का 22वां वर्षिक प्रतिवेदन वित्त वर्ष 2023-24 को पटल पर रखा।