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मप्र में पीपीपी मोड पर विकसित होंगी नर्सरियां
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मुख्यमंत्री के निर्देश विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की खाली जमीन पर विकसित करें उद्यान
भोपाल। मध्यप्रदेश में विश्वविद्यालयों सहित अन्य शासकीय विभागों की खाली जमीनों पर उद्यान विकसित करने तथा प्रदेश में पीपीपी मोड पर नर्सरीयां विकसित करने के लिए कार्य योजना बनायी जाए। प्रदेश के सभी जिलों में उद्यानिकी और खाद्य प्र-संस्करण पर केंद्रित कार्यशाला और मेले आयोजित कर किसानों और उद्यमियों को अन्य जिलों में हुए नवाचारों से परिचित कराया जाए। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों की जिलेवार मैपिंग की जाए। इस तरह के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर उद्यानिकी तथा खाद्य प्र-संस्करण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में उद्यानिकी तथा खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने यह भी दिए निर्देश
- रोजगारपरक गतिविधियों के लिए खाद्य प्र-संस्करण पर विशेषज्ञता आधारित सेल गठित किया जाए।
- चंबल, मालवा और महाकौशल में क्षेत्र विशेष की आवश्यकतानुसार उद्यानिकी विकास की कार्य योजना बनाएं।
- बागवानी और नर्सरी लगाने को जन आंदोलन बनाना जरूरी, विधायक और पंचायत प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में आदर्श बागवानी विकसित करें।
- उद्यानिकी में नवाचार करने वाले किसानों को सम्मानित किया जाए।
- इन्वेस्टर्स समिट की तरह प्रदेश में उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण पर समिट आयोजित हों।
- किसानों की उपज के लिए उपयुक्त सुविधाजनक स्थानों पर स्टोरेज की व्यवस्था की जाए एवं निकटतम मंडी में फसलों के सही दामों की जानकारी की व्यवस्था की जाए।
- दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र जैसी संस्थाओं से किसानों के संवाद को भी प्रोत्साहित किया जाए।
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बैठक में अधिकारियों ने दी यह जानकारी
- आगामी माह में नीमच, मंदसौर में औषधीय कृषि के लिए उद्यानिकी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव होगा।
- प्रदेश में 22 लाख 72 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलें ली जा रही हैं। आगामी 5 वर्ष में 33 लाख 91 हजार हैक्टयर तक ले जाने का लक्ष्य है। - प्रदेश मसालों के उत्पादन में देश में प्रथम, उद्यानिकी में द्वितीय, पुष्प और सब्जी उत्पादन में तृतीय तथा फल उत्पादन में देश में चौथे स्थान पर है।
- रीवा के सुंदरजा आम और रतलाम के रियावन लहुसन को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से खरगोन की लाल मिर्च, जबलपुर के मटर, बुरहानपुर के केले, सिवनी के सीताफल, बरमान नरसिंहपुर के बैंगन, बैतूल के गजरिया आम, इंदौर के मालवी आलू, रतलाम की बालम ककड़ी, जबलपुर के सिंघाड़ा, धार की खुरासानी इमली और इंदौर के मालवी गराडू को जीआई टैग दिलाने की प्रकिया जारी है।
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