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हीरे पर मप्र का एकाधिकार, मैग्जीन-तांबा उत्पादन में भी शीर्ष पर

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भारत के आठ खनिज सम्पन्न राज्यों में तीसरे पायदान पर मध्यप्रदेश

भोपाल । मध्यप्रदेश के राजस्व संग्रहण में खनिज क्षेत्र का बड़ा योगदान है। देश में आधा दर्जन स्थानों पर हीरा पाए जाते हैं, लेकिन भण्डार की प्रचुरता और खनन के मामले में मध्यप्रदेश (पन्ना) का इस पर एकाधिकार है। वहीं मैग्जीन और कॉपर अयस्क के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश देश में शीर्ष पर है। जबकि कोयला में तीसरे नंबर पर होते हुए भी यह प्रदेश का खनिज राजस्व देने वाला सबसे बड़ा स्रोत है। 

भारतीय खान ब्यूरो, नागपुर की मासिक सांख्यिकी के अनुसार खनिज संम्पदा की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश में आठ खनिज सम्पन्न राज्यों में से एक है। मप्र में वर्तमान में प्रमुख रूप से आठ प्रकार के खनिजों का उत्पादन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के पन्ना जिला में लगभग 45 लाख, 80 हजार 336 कैरेट हीरे का भण्डार है, और प्रतिवर्ष करीब एक लाख कैरेट हीरा भू-गर्भ से बाहर निकाला जाता है। इसी प्रकार मैग्जीन और ताम्र अयस्क के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। रॉकफॉस्फेट और चूना पत्थर के उत्पादन में मप्र का दूसरा स्थान है। कोयला उत्पादन वाला मप्र सबसे बड़ा चौथा राज्य है। आयरन और बॉक्साइड उत्पादन में मप्र छटवें स्थान पर है। 


मलाजखण्ड से हर माह 2 लाख टन तांबा उत्पादन 

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की मलाजखण्ड तांबा खदान भारत की सबसे बड़ी ताम्बा खदान है। इस खदान से प्रतिदिन 5 से 10 हजार टन ताम्बा निकाला जाता है। भारत के कुल ताम्बा भण्डार का 70 प्रतिशत ताम्बा मध्यप्रदेश में है। 

एक साल में 170 मिलियन टन कोयला उत्पादन 

चीन के बाद भारत कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा 30 हजार 916 मेट्रिक टन ज्ञात कोयला भण्डार है, जो देश का कुल 8 प्रतिशत है। भारत के इस शीर्ष स्थान में मध्यप्रदेश का भी अहम योगदान है। कोयला उत्पादन में मप्र देश का चौथा बड़ा राज्य है।  मप्र में 2022 में 137.953 मिलियन टन और 2023 में 146.029 मिलियन टन कोयला उत्पादन हुआ था, इस बढ़ते कोयला उत्पादन को देखते हुए मप्र में 2024-25 के लिए 170 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य लिया था। मप्र में नए कोयला भण्डारों के मिलने से हर वर्ष यह लक्ष्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। 


देश का 9 प्रतिशत चूना मध्यप्रदेश में 

भारत में चूना पत्थर का कुल ज्ञात भण्डार 19028.5 मैट्रिक टन है, इसमें से मध्यप्रदेश में 1692 मिट्रिक टन है, जो देश का 9 प्रतिशत है। लौह अयस्क देश में 6209 और मध्यप्रदेश में 54.1 मीट्रिक टन है, जो देश का एक प्रतिशत है।


मप्र में भारत का 73 प्रतिशत तांबा 

भारत के भू-गर्भ में 163.9 मैट्रिक टन तांबे का ज्ञात भण्डार है। इसमें से 120.4 मीट्रिक टन मध्यप्रदेश में है, जो देश का 73 प्रतिशत है। इसी प्रकार मैंगनीज अयस्क 75.0 मीट्रिक टन है। मध्यप्रदेश में 19.6 मिट्रिक टन है, जो देश का 26 प्रतिशत है। बॉक्साइट 640.5 मीट्रिक टन है और मध्यप्रदेश में 18.6 मीट्रिक टन है, जो देश का तीन प्रतिशत है। रॉक फॉस्फेट देश में 30.9 मैट्रिक टन भण्डार है और मध्यप्रदेश में 9  मीट्रिक टन है, जो 29 प्रतिशत है।


मप्र में जिलावार खनिजों के भण्डार 


चूना पत्थर: रीवा, सतना, सीधी, मैहर, दमोह, कटनी पन्ना, धार और नीमच में है। मप्र में यह देश के कुल लाइमस्टोन भंडार का 9 प्रतिशत है। 


हीरा: देश में उपलब्ध डायमंड भंडार का 90 प्रतिशत मध्यप्रदेश में पाया जाता है। यह अकेले पन्ना और छतरपुर में है। 


पायरोफ्लाइट: मप्र में पायरोफ्लाइट देश के उत्पादन का 41 प्रतिशत उत्पादन हो रहा है। देश में सर्वाधिक भंडार 14 मिलियन टन मध्यप्रदेश में है, जो छतरपुर, शिवपुरी और टीकमगढ़ में है। 


अन्य खनिज : ग्वालियर और शिवपुरी में आयरन, क्वार्ट्ज और फ्लैगस्टोन , झाबुआ और अलीराजपुर में रॉक फास्फेट डोलोमाइट, लाइमस्टोन, मैंगनीज और ग्रेफाइट, नीमच में लाइमस्टोन, बैतूल में कोल, ग्रेफाइट ग्रेनाइट, लेड और जिंक तथा छिंदवाड़ा में कोल, मैंगनीज और डोलोमाइट मिलता है। इसी प्रकार बालाघाट में कॉपर, मैंगनीज, डोलोमाइट, लाइमस्टोन, बॉक्साइट, मंडला और डिंडोरी में डायमंड, डोलोमाइट और बॉक्साइट, सिंगरौली में कोल, गोल्ड, आयरन और शहडोल, अनूपपुर, उमरिया में कोल, कॉल बेड मीथेन, बॉक्साइट, सागर, छतरपुर और पन्ना में डायमंड, रॉक फॉस्फेट डायस्पोर, आयरन और ग्रेनाइट मिलता है। जबलपुर में डोलोमाइट, आयरन अयस्क, लाइमस्टोन, मैंगनीज, गोल्ड और मार्बल उपलब्ध है।