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मध्यप्रदेश
संकट की घड़ी में बाढ़ पीडि़तों के साथ है सरकार
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28400 बाढ़ पीडि़तों को तीस करोड़ राहत राशि वितरित कर मुख्यमंत्री ने किया सीधा संवाद
भोपाल। ‘जनता को तकलीफ आए तो हम शांत नहीं बैठ सकते। ऐसी असामान्य बाढ़ की कल्पना नहीं थी। संकट के समय सरकार हर पल सतर्क रही। संघर्ष के क्षण में सरकार सदैव पीडि़तों के साथ है। सरकार का आपसे परिवार की तरह रिश्ता है। सरकार और समाज अलग-अलग नहीं हैं। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को प्रदेश के बाढ़ पीडि़तों को राहत राशि का वितरण करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से 28400 बाढ़ पीडि़तों के खाते में तीस करोड़ रुपये राशि अंतरित की।
माँ-बाप भी नहीं करते, प्रशासन ने की उतनी सेवा
बाढ़ प्रभावितों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने पूछा कि किस तरह की स्थिति बनी और प्रशासन तथा स्थानीय लोगों ने किस तरह से लोगों को सुरक्षित निकाला। दमोह की एक महिला ने कहा कि जितनी सेवा मां बाप नहीं करते, बाढ़ के दौरान वैसी सेवा प्रशासन की टीम ने की है।एक ग्रामीण ने बताया कि प्रशासन ने नाव से ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला।
प्रशासन ने दिखाई संवेदनशीलता, मिली हर जरूरी राहत
रायसेन के एक प्रभावित से मुख्यमंत्री ने आपदा के दौरान आई परेशानियों और प्रशासन की भूमिका के बारे में सवाल किया। पीडि़त ने कहा कि प्रशासन की संवेदनशीलता से समय पर राहत मिली। संतोष राय ने कहा कि उनके घर में पानी घुसने की जानकारी मिलते ही प्रशासन की टीम ने मदद की। मेरा नुकसान बहुत हुआ है, प्रशासन ने सहयोग का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की घड़ी में सभी साथ हैं।
अच्छा बोलने के लिए अधिकारियों ने तो नहीं सिखाया
गुना के बाढ़ पीडि़त मलकीत सिंह ने बताया कि रात में चार बजे प्रशासन की टीम ने सुरक्षित निकालना शुरू किया। मुख्यमंत्री ने उससे पूछा कि आपको अच्छा -अच्छा बोलने के लिए अफसरों ने सिखाया तो है। सही सही बोलना, आपको भगवान की कसम है। पीडि़त ने मना किया। मुख्यमंत्री ने कहा, अभी फसल के नुकसान का सर्वे नहीं हुआ है। उसकी क्षतिपूर्ति की राशि अलग से दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने गुना कलेक्टर किशोर कान्याल से कहा कि गुना प्रवास के दौरान जहां वे नहीं जा पाए हैं, वहां कलेक्टर पहुंचकर लोगों की व्यवस्था की जानकारी लेंगे। इस दौरान छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने पिछले महीने आई बाढ़ पीडि़तों से मुख्यमंत्री की बात कराई। चंद्रमोहन मालवीय ने कहा कि जो नुकसान हुआ है उसके लिए प्रशासन ने मदद की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कष्ट और दुख की घड़ी में सरकार और प्रशासन साथ रहा। आगे भी पूरा सहयोग रहेगा।
मुख्यमंत्री बोले-कलेक्टर पतले, सरपंच साहब चकाचक
दमोह के सरपंचों और बाढ़ प्रभावितों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हास-परिहास करते हुए कहा कि मेरे कलेक्टर भी दुबले पतले हैं और दूसरे अफसर भी दुबले पतले हैं, सरपंच साहब लोग अच्छे चकाचक दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद ठहाके गूंजे।
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मानसून से 286 की मौत, 1685 पशुहानि
प्रदेश में अब तक 729.1 एमएम अर्थात सामान्य से 37 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हो चुकी है। गुना, निवाड़ी, टीकमगढ़, मंडला एवं अशोकनगर में सर्वाधिक वर्षा हुई है। इस मानसून में अभी तक कुल 296 जनहानि तथा लगभग 1685 पशुहानि हुई है। साथ ही 299 मकान पूरी तरह और 4114 आंशिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रदेश में अब तक 61 राहत कैम्प चलाये गये है, जिनमें 7345 लोगों को रखा गया। बाढ़ की स्थिति में सहायता के लिये टोल फ्री नं-1079 जारी किया गया है।
सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी किया सहयोग
मुख्यमंत्री ने बताया कि अतिवृष्टि और बाढ़ के संकट से निपटने के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सेना के जवानों की जहां आवश्यकता पड़ी, वहां सक्रिय किया गया। अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावितों को मदद करने में सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने इन संगठनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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