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डीएफओ की नौकरी अधर में डाल गई मरी बाघिन
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- पदीय लापरवाही और अनुशासनहीनता पर हो सकती है कार्रवाई
- वन मुख्यालय को डीएफओ अधर गुप्ता के स्पष्टीकरण का इंतजार
भोपाल। मरी हुई बाघिन डीएफओ बालाघाट साऊथ की नौकरी अधर में डाल गई है। क्योंकि पदीय दायित्वों में लापरवाही और अनुशासनहीनता को देखते हुए वन मुख्यालय डीएफओ अधर गुप्ता पर कार्रवाई कर सकता है। इसके पहले वन मुख्यालय ने मामले में नाराजगी जाहिर कर स्पष्टीकरण चाहा है।
दरअसल बालाघाट जिले के लालबर्रा परिक्षेत्र में मादा बाघ की संदिग्ध मौत और साक्ष्य मिटाने की कोशिशों ने वन विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कारण यह है कि डीएफओ द्वारा राष्ट्रीय पशु बाघ को बिना वन अपराध पंजीबद्ध किये और बिना प्रक्रिया के जलाकर बाघ के शव को नष्ट कर मामले को दबाने का प्रयास सामने आया है। इसके बाद लापरवाही पर पर्दा डालने डीएफओ द्वारा निचले कर्मचारियों को निलंबित भी कर दिया गया।
वन मुख्यालय ने मांगा जबाव
वन मुख्यालय ने इस मामले में डीएफओ से जबाव मांगा है। कर्तव्य में लापरवाही करने पर वन बल प्रमुख बीएन अंबाड़े ने आरोपी अधिकारी अधर गुप्ता से स्पष्टीकरण मांगा है। इसके लिये 10 दिन का समय दिया है। वहीं प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी शुभरंजन सेन ने भी कारण बताने के लिये कहा है।
धड़ाधड़ कार्रवाई बताती है हुई गड़बड़ी
टाइगर की संदिग्ध मौत पर प्रकरण दर्ज होने के बाद डिप्टी रेंजर सहित 5 वनकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इसमें डिप्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे फरार हो गए हैं। इन पर साक्ष्य मिटाने के आरोप हैं। बालाघाट वन संरक्षक गौरव चौधरी ने मामले की जांच के लिए एसडीओ के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया है।
15 दिन बाद हुआ खुलासा
वन बल प्रमुख द्वारा जारी पत्र से स्पष्ट है कि संबंधित डीएफओ द्वारा मामले को 15 दिन दबाए रखा गया है। इसके बाद 2 अगस्त को बाघ मृत्यु का प्रकरण दर्ज कराया गया है। ग्रामीणों व चरवाहों से हुई पूछतांछ का हवाला देते हुए इसमें बताया गया है कि नाले से बहकर आए बाघ के शव की सूचना मिलने के बाद राज्यस्तरीय कार्यालय को बताने के बजाय 4-5 किमी दूर जंगल के अंदर जलाया गया है।
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