मध्यप्रदेश
सौरभ, शरद और चेतन के खिलाफ आरोप पत्र पेश
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प्रवर्तन निदेशालय की न्यायालय में मांग, अघोषित संपत्तियों को करें राजसात
भोपाल। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा तथा उसके दोनों साथियों चेतन गौर और शरद जायसवाल के जमानत आवेदन पर निर्णय से पहले तीनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने मंगलवार को विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में आरोप पत्र (चालान) पेश कर दिया। 11 अप्रैल को न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई होगी।
उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय तीनों आरोपियों और उनसे परिजनों, मित्रों, फर्म, कंपनियों और सोसायटियों के नाम पर मिली 92.07 करोड़ की संपत्ति एवं ईडी की कार्रवाई में मिली संपत्ति मिलाकर कुल 100 करोड़ 36 लाख रुपये कीमत की संपत्तियों को पहले ही अनंतिम रूप से कुर्क कर चुकी है। इन संपत्तियों को ईडी ने अनुपातहीन मानते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत कुर्क किया है। इसमें मेंडोरी के जंगल में मिली चेतन की कार और उससे मिले 52 किलो सोना और 11 करोड़ की नकदी भी शामिल है, जिसे ईडी ने सौरभ का ही माना है। जब्त अन्य संपत्तियों में सौरभ के सहयोगियों, संस्थाओं में शरद जायसवाल, चेतन सिंह गौर, मेसर्स अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अविरल एंटर प्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स यू आर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड आदि शामिल हैं।
लोकायुक्त प्रकरण में मिल चुकी है जमानत
सौरभ, चेतन और शरद तीनों को लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्रकरण में 60 दिन से अधिक समय में चालान पेश नहीं किए जाने से तीनों को जमानत मिल चुकी है, जबकि विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में भी तीनों की जमानत का आवेदन लगाया गया है। जिस पर 11 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
संपत्तियों को राजसात किए जाने की अनुमति
सूत्रों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप पत्र में अधिकांश संपत्तियों को सौरभ का बताया है। चेतन गौर और शरद जायसवाल सहित अन्य परिजनों के नाम पर मिली संपत्तियों को भी अवैधानिक तरीके से कमाने का उल्लेख भी है। बताया जा रहा है कि ईडी ने तीनों आरोपियों के यहां छापों में मिली अघोषित एवं बेनामी संपत्तियों को राजसात किए जाने की बात आरोप पत्र में लिखी है।
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