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जमानत अवधि बढ़ाने न्यायालय में आवेदन लगाएंगे चेतन के परिजन

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पांच दिन बाद खत्म हो रही सौरभ के साथी की जमानत अवधि 

भोपाल। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के सबसे करीबी कारोबारी साथी चेतन सिंह गौर के परिजन उसकी जमानत अवधि बढ़वाने की तैयारी कर रहे हैं। न्यायालय ने मानवीय संवेदना को आधार मानकर बीमार पत्नी और नवजात बच्चों की देखभाल के लिए जमानत दी थी।  उसी आधार पर परिजन एक बार फिर से जमानत के लिए प्रयास करेंगे। 

उल्लेखनीय है कि 18 दिसम्बर 2024 को भोपाल में सौरभ शर्मा के यहां लोकायुक्त और आयकर के छापों के बाद 27 जनवरी 2025 को न्यायालय में हाजिर हुए सौरभ, शरद और चेतन की लोकायुक्त टीम ने 28 जनवरी को गिरफ्तारी दिखाई थी। इसके बाद से ही तीनों जेल में हैं। लोकायुक्त टीम रिमांड लेकर जबकि आयकर और प्रवर्तन निदेशालय जेल में तीनों आरोपियों से पूछताछ कर चुकी हैं। लोकायुक्त प्रकरण में तीनों को जिला न्यायालय से जमानत भी मिल चुकी है। लेकिन प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज प्रकरणों में इन तीनों ही आरोपियों की जमानत जिला न्यायालय के बाद उच्च न्यायालय से भी खारिज हो चुकी थी। विगत 13 अगस्त को न्यायालय ने चेतन गौर को बीमार पत्नी और नवजात जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए मानवीयता के आधार पर 14 दिन की अस्थायी जमानत दी है। इस जमानत की अवधि 27 अगस्त को समाप्त हो रही है और 28 अगस्त तक चेतन को जिला न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा। 

चेतन की कार से मिला था 52 किलो सोना, 11 करोड़ नकदी

सौरभ शर्मा के ठिकानों पर लोकायुक्त के छापे के बीच उसके घर से निकली जिस कार क्रमांक एमपी 07 0050 में आयकर विभाग की टीम को मेंडोरी के जंगल में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकदी मिले थे। यह कार चेतन गौर के नाम पर पंजीकृत है। इसी आधार पर तीनों ही जांच एजेंसियों ने सौरभ के साथ चेतन को आरोपी बनाया। सौरभ के घर से मिले संपत्ति, कंपनी, फर्मों और सोसायटी दस्तावेजों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने न्यायालय ने शरद जायसवाल सहित सौरभ के परिजनों व रिश्तेदारों को आरोपी बनाया।