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मध्यप्रदेश
मप्र के बांधों में घट रही मछली की पैदावार
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लक्ष्य से आधा उत्पादन भी नहीं कर सके प्रदेश के 28 प्रमुख बांध
भोपाल। मध्यप्रदेश के 28 प्रमुख जलाशयों (बांध) में प्रतिवर्ष होने वाला मछली उत्पादन लगातार घट रहा है। विगत दो वर्षों में यह घटकर आधे से भी कम रह गया है। इससे न केवल शासन का राजस्व कम हुआ है, बल्कि ग्रामीणों को बांधों की देखरेख, रखरखाव और मत्स्याखेट के लिए मिलने वाले रोजगार पर भी असर पड़ा है।
इन प्रमुख बांधों में होता है मत्स्य उत्पादन
गांधी सागर, इंदिरा सागर, बाणसागर, बरगी,भीमगढ़, तवा, हलाली, बारना, कोलार, केरवा, ओंकारेश्वर, मड़ीखेड़ा, राजघाट चंदेरी, हरसी, मोहनी, राजघाट-सागर, सगढ़ विदिशा, माही, कुटनी, संजय सागर, थावर, मान, माचागोरा, मोहनपुरा, बानसुजारा, कुण्डालिया, तेंदुघाट, गुलाबसागर। इन सभी 28 जलाशयों में का कुल औसत जल क्षेत्र 2.31 लाख हेक्टेयर है और 35 हेक्टेयर जल क्षेत्र के 6 मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों और 197 ग्रामीण पोखरों में भी मत्स्य बीज उत्पादन होता है।
लक्ष्य से कितना पीछे रहे बांध
वर्ष 2023-24 में सभी 28 बांधों में मत्स्य उत्पादन का 12 हजार टन का लक्ष्य मिला था, लेकिन लक्ष्य के विपरीत कुल 6371.048 टन मत्स्य उत्पादन ही हो सका था। लक्ष्य पूरा नहीं होने पर भी वर्ष 2024-25 के लिए 14 हजार टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया। लेकिन दिसम्बर 2024 तक कुल 6039.214 टन मत्स्य उत्पादन ही हो सका। प्रति माह के अनुपात में 9 माह में 10500 टन उत्पादन होना था। इसी प्रकार केजों से उत्पादन के लक्ष्य 2023-24 में 3000 टन के विपरीत 2040 टन और 2024-25 में 3000 टन के विपरीत (31 दिसम्बर तक) 312.884 टन ही मछली उत्पादन हो सका।
तवा में शून्य, हलाली में लक्ष्य से आगे
तवा बांध में 2023-24 और 2024-25 में मत्स्य उत्पादन नहीं हुआ। जबकि कुण्डालिया में 2023-24 में मत्स्य उत्पादन के 150 टन के लक्ष्य के विपरीत उत्पादन शून्य रहा। 27 बांध लक्ष्य से पीछे रहे, जबकि हलाली बांध दोनों ही सालों में लक्ष्य से आगे रहा। हलाली बांध में 2023-24 में 340 टन के लक्ष्य के विपरीत 373.189 टन और 2024-25 में 400 टन के वाषिक लक्ष्य के विपरीत कुल 9 महीने में ही लक्ष्य से दो गुना से अधिक 969.064 टन मत्स्य उत्पादन हुआ।
सहकारी समितियों को मिलता है मत्स्याखेट का काम
जल संसाधन विभाग के अधीन राज्य के सभी प्रमुख 28 बांधों में मत्स्याखेट का काम सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जाता है। आखेटित मत्स्य की बिक्री भी आउटसोर्स नियुक्त कर उसके माध्यम से होता है। मछुओं को मछली की प्रजाति के अनुसार 34 रुपये और 20 रुपये प्रति किलो की दर से पारिश्रमिक दिया जाता है। मप्र में मत्स्याखेट पर सर्वाधिक पारिश्रमिक दिया जाता है। मप्र के बांधों में मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से होने वाले मत्स्याखेट से हर साल करीब 5 लाख मानव दिवस या इससे अधिक रोजगार सृजित होता है। महासंघ के जलाशयों में 2473 महिला एवं 12427 पुरुष मछुआ हैं।
विभागीय राज्यमंत्री ने नहीं दिया जवाब?
मत्स्य उत्पादन में लगातार कमी के संबंध में प्रतिक्रिया के लिए मप्र के मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के राज्यमंत्री नारायण पवार से उनके मोबाइल पर संपर्क किया। उनके सहयोगी ने व्यस्तता बताकर बात नहीं कराई। वॉट्सअप पर भेजे गए प्रश्न का भी जवाब उन्होंने नहीं दिया।विभागीय प्रमुख सचिव डीपी आहूजा ने भी मोबाइल रिसीव नहीं किए।
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