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सालभर से राजधानी के चक्कर काट रहे परेशान विद्यार्थी
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धरना-प्रदर्शन, मंत्री-अधिकारियों से शिकायत, फिर भी फार्मेसी काउंसिल में नहीं हो पा रहे छात्रों के पंजीयन ---
भोपाल। बी-फार्मा और डी-फार्मा करने वाले विद्यार्थियों को फार्मेसी काउंसिल में पंजीयन के लिए एक साल से भी अधिक समय से परेशान होना पड़ रहा है। महाविद्यालय से काउंसिल तक की सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अधिकांश विद्यार्थियों के पंजीयन रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण अटके हैं। लम्बे समय से नियमित राजिस्ट्रार की नियुक्ति नहीं होने से भी यह स्थिति बनी हुई है।
मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों और महाविद्यालयों से बी-फार्मा और डी-फार्मा की डिग्री करने वाले विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद उन्हें फार्मेसी काउंसिल से पंजीयन कराना होता है। इस पंजीयन के लिए विद्यार्थी एक साल से भी अधिक समय से चक्कर लगा रहे हैं। काउंसिल में पंजीयन नहीं होने से यह विद्यार्थी न तो नौकरी के लिए आवेदन कर पा रहे हैं और न ही डिग्री से जुड़ा फार्मा कारोबार ही कर पा रहे हैं। खास बात यह है कि पंजीयन के लिए परेशान छात्र, दोनों प्रमुख राजनीतिक छात्र संगठनों कांग्रेस के भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेतृत्व में यहां प्रदर्शन कर चुके हैं। मंत्री से लेकर अधिकारियों तक शिकायत और ज्ञापन भेजे गए हैं, लेकिन पिछले करीब डेढ़ साल से इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
रजिस्ट्रार की नियुक्ति, लेकिन कुर्सी खाली
लम्बे समय से फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार की कुर्सी पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई है, वहीं अतिरिक्त प्रभार में नियुक्ति वाले अधिकारी यहां बैठना नहीं चाहते। वर्तमान में खाद्य एवं औषधि प्रशासन मप्र में संयुक्त नियंत्रक श्रीमती माया अवस्थी के पास काउंसिल में रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार है। परेशान छात्रों का कहना है कि मैडम नियुक्ति के बाद से एक भी दिन यहां नहीं बैठी हैं। उनकी कुर्सी और चेम्बर दोनों ही खाली पड़े हैं। रजिस्ट्रार श्रीमती अवस्थी परेशान छात्रों के फोन भी नहीं उठाती हैं। ऐसी सिथति में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हजारों रुपये खर्च कर छात्र बार-बार राजधानी के चक्कर लगा रहे हैं।
परेशान छात्रों को बरगला रहे काउंसिल के दो छात्र
फार्मेसी काउंसिल में पदस्थ लिपिक गोपाल यादव सहित एक अन्य यादव बाबू यहां पहुंच रहे परेशान छात्रों से मिलते हैं। प्रदेशभर से काउंसिल पहुंचने वाले आवेदकों को अपनी परेशानी बताने के लिए कभी लम्बी लाइन में लगना पड़ता है, कभी इन बाबुओं से बहस करनी पड़ती है। विद्यार्थियों का आरोप है कि गुपचुप तरीके से पंजीयन हो रहे हैं। ये दोनों बाबू तय कर रहे हैं कि किस फाइल और प्रमाण पत्र को हस्ताक्षर के लिए मैडम के पास भेजा जाए। उल्लेखनीय है कि इंदौर के विजय नगर थाना पुलिस द्वारा पकड़ी गईं बी.फार्मा और डी.फार्मा की फर्जी डिग्रियों के मामले में काउंसिल के दो बाबुओं पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है।
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