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मप्र बन सकता है पांचवां सर्वाधिक प्राकृतिक गैस उत्पादक राज्य
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पेट्रोलियम खनिजों की खोज पर मुख्यमंत्री और सरकार का फोकस
भोपाल। महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और असम के बाद जल्द ही मध्यप्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस उत्पादक राज्य बन सकता है। मप्र के भू-गर्भ में प्राकृतिक गैसों और तेल के भण्डारों की संभावना तलाशने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार ने हर संभव प्रयास शुरू कर दिए हैं। आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश से गैस उत्पादन के अलावा तमिलनाडू, त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी उपलब्ध हैं, लेकिन प्रकृति के अनुरूप विशेषज्ञ मप्र में इनसे कहीं अधिक संभावना जता रहे हैं।
5 ब्लॉक में जारी पेट्रोलियम खनिजों की खोज
पेट्रोलियम तेल ओर प्राकृतिक गैसों की खोज के लिए राज्य सरकार ने कुल 18,547 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पेट्रोलियम अन्वेषण लायसेंस स्वीकृत किए हैं। 5 ब्लॉक्स में अन्वेषण का काम शुरू हो चुका है, जबकि 6 ब्लॉक्स में आवश्यक स्वीकृतियां जारी होनी है। स्वीकृति मिलते ही खोज शुरू हो जाएगी। इन क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन और कोल बेड मीथेन के समृद्ध भंडार मिलने की संभावना है।
यह हैं पेट्रोलियम-प्राकृतिक गैस संभावित क्षेत्र
मध्यप्रदेश की भूगर्भीय संरचना के अनुसार पेट्रोलियम-प्राकृतिक गैस और कोल बेड मीथेन (सीबीएम) जैसे हाइड्रोकार्बन संसाधन मिलने की अपार संभावनाएं है। विशेषज्ञों के अनुसार राज्य के पूर्वी हिस्से में गोंडवाना बेसिन और पश्चिमी-दक्षिणी हिस्से में नर्मदा एवं ताप्ती घाटियों में अवसादी चट्टानों का व्यापक प्रसार है। विशेषज्ञों के अवसादी चट्टानों वाला क्षेत्र हाइड्रोकार्बन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, दमोह, पन्ना, छतरपुर, सागर, नरसिंहपुर, रायसेन, खंडवा, खरगोन, बड़वानी और छिंदवाड़ा जिलों में हाइड्रोकार्बन और कोल बैड मीथेन गैस की संभावनाएं विशेष रूप से चिन्हित हुई हैं।
सीबीएम उत्पादन के लिए रिलायंस को मिली दो लीज
मप्र में अभी सीबीएम के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए 2 पेट्रोलियम माइनिंग लीज रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को दी गई हैं। शहडोल और अनूपपुर जिलों के 500 वर्ग किलोमीटर ब्लॉक में कंपनी द्वारा वाणिज्यिक उत्पादन किया जा रहा है। यहां 495 वर्ग किलोमीटर ब्लॉक में शीघ्र उत्पादन आरंभ होने की उम्मीद है। इसी प्रकार दमोह जिले के हटा क्षेत्र में 200.2 वर्ग किलोमीटर का प्राकृतिक गैस ब्लॉक खोजा गया है। शासन ने इसे 15 वर्षों के लिए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) को स्वीकृत किया गया है। आवश्यक स्वीकृतियां मिलते ही यहां उत्पादन कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
खनिजों की खोज के लिए तीन कंपनियों से एमओयू
विगत 23 अगस्त को कटनी में हुए खनिज सम्मेलन में विशेषकर खनिजों की खोज के लिए तीन समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुए हैं। क्रिटिकल मिनरल की खोज, प्रसंस्करण और संवर्धन के लिए कोल इंडिया लिमिटेड से, खनन क्षेत्र में आर्टिफियल इंटेलीजेन्स, आईओटी, ब्लॉक चेन, रिमोट सेंसिंग के उपयोग के लिए धनबाद की टेक्समिन आईएसएम से और खनिज अन्वेषण अनुसंधान के लिए भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल के साथ भी एमओयू हुए हैं। खनिज समृद्ध राज्य बनाने के लिए सरकार ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल नवाचारों की श्रृंखला लागू की है।
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