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इलेक्ट्रिक वाहनों की लाइनें बढ़ाएंगी सरकार की परेशानी!

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राज्य में प्रदूषण और नागरिकों का जेब खर्च कम करेगी नई ईव्ही नीति, लेकिन कई चुनौतियां भी सामने 

भोपाल। मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक दो पहिया व तिपहिया वाहन, 20 लाख तक की ई-कार, हल्के वाणिज्यिक ई-वाहनों के (26 मार्च 2026 तक) एवं गैर सरकारी निजी ई-बस, ई-ट्रक, ई-टै्रक्टर, ई-एम्बुलेंस के (26 मार्च 2027 तक) पंजीयन पर सरकार ने मोटरयान कर (रोड टैक्स) में सौ प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया है। इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रोत्साहन और राज्य में प्रदूषण कम करने की दिशा में सरकार का यह निर्णय बहुत ही सराहनीय है, लेकिन इससे मप्र में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि के संकेत भी हैं। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में खरीदे जाने वाले ई-वाहन खरीदारों और सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर सकते हैं। शहरी क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर चार्जिंग पोइंट बनाने का प्रस्ताव भी पर्याप्त स्थान और बड़े खर्च के कारण पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पा रहा है। 


ई-वाहनों की लाइनें इस तरह बनेंगी चुनौती 

मप्र में राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन सहित दूसरे जिलों के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक दो पहिया एवं तिपहिया रिक्शा की अच्छी खासी पहुंच हो चुकी है। बड़े शहरों में ई-कारें भी खरीदी गई हैं। चूंकि अभी इन वाहनों के चार्जिंग की व्यवस्था अवैधानिक तरीके से घरेलू बिजली मीटरों अथवा घर पर ही व्यवसायिक मीटर लगवाकर हो रही है, लेकिन प्रोत्साहन के फेर में ई-बस, ई-ट्रक, ई-ट्रैक्टर अथवा ई-एम्बुलेंस सडक़ों पर उतरेंगी तब यह बड़ी चुनौती पेश कर सकती हैं। स्कूली अथवा निजी बसों सहित अन्य व्यवसायिक वाहनों के शहरी क्षेत्र में अथवा राजमार्गों पर चार्जिंग की अभी समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसी स्थिति में इन वाहनों का लम्बी दूरी तक परिवहन चुनौतीपूर्ण होगा। 

बैट्री चार्ज पर भुगतान और स्थान बढ़ाएगा परेशानी 

केन्द्र सरकार की योजना देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशन तैयार करने की है। इसके लिए कई बड़ी कंपनियां आगे भी आई हैं, लेकिन इस व्यवस्था में भी बड़ी चुनौती यह होगी कि बैट्री चार्ज होने तक वाहन को स्टेशन पर खड़ा रखने के लिए पर्याप्त स्थान की जरूरत होगी। अत्याधुनिक चार्जर लगाने होंगे जो बड़े वाहनों की भारी बैट्री को कम समय में चार्ज कर सके। बैट्री चार्जिंग की राशि की दरों का भी स्पष्ट निर्धारण अभी नहीं हो सका है, क्योंकि अलग-अलग प्रदेश और शहरों में बिजली की दरें अलग-अलग हैं। बैटरी रीचार्जिंग के भुगतान के लिए कंपनियों द्वारा प्रीपेड कार्ड जारी किए जाने की बात सामने आई है। ऐसी स्थिति में राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशन बनाने वाली अलग-अलग कंपनियों का प्रीपेड कार्ड रख पाना संभव नहीं होगा। फास्टटैग की तर्ज पर संयुक्त कार्ड बनाए जाने पर भी मंथन चल रहा है। 


चार्जिंग पॉइंट बनाने तैयार नहीं पेट्रोल पंप संचालक 

शहरी क्षेत्रों के पेट्रोल पंप संचालकों को सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग पॉइंट बनाने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन पेट्रोल पंप संचालक इसके लिए तैयार नहीं हैं। इसका कारण यह है कि एक वाहन में पेट्रोल या डीजल भरने में उन्हें अधिकतम 5-10 मिनट तक लगते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक कार या दूसरे बड़े वाहन की बैटरी को बैटरी की क्षमता और चार्जर की गुणवत्ता के अनुपात में कम से कम एक से 12 घंटे तक का समय लगता है। एक साथ चार या उससे अधिक वाहन बैट्री चार्ज कराने खड़े होने की स्थिति में पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाने वाले वाहनों के लिए स्थान कम पड़ जाएगा। साथ ही ई-वाहनों के चार्जिंग से उतना फायदा भी नहीं होगा। 

‘कंपनियों की ओर से चार्जिंग पोइंट बनवाने के प्रस्ताव दिए गए हैं। भोपाल सहित प्रदेश के दूसरे शहरों में भी कुछ पेट्रोल पंपों पर यह बना भी है। शहरी क्षेत्र में स्थान की कमी सबसे बड़ी समस्या है। इसके लिए अलग से ट्रांसफार्मर भी अलग से लगवाना पड़ता है, जो काफी महंगा है। ’


नकुल शर्मा, सचिव 

पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन, मप्र 

‘चार्जिंग पोइंट कंपनी खुद के खर्च पर लगा रही है, लेकिन ट्रांसफार्मर सहित दूसरी व्यवस्थाएं डीलर को करनी पड़ती है, जिसमें लगभग 15 लाख रुपये का खर्च आता है। डीजर रुचि तो ले रहे हैं, लेकिन जगह और खर्च के कारण पीछे हट रहे हैं’ 

फैज अली, ठेकेदार (चार्जिंग स्टेशन)

हिन्दुस्तान इलेक्ट्रोनिक्स