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मंत्रालय में मौजूद हैं मध्यप्रांत काल तक की प्रशासकीय अभिलेखों का भण्डार
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जनगणना, विश्वकोष सहित प्राचीन पुस्तकों से मप्र का इतिहास खोज रहे शोधार्थी
भोपाल। मध्यप्रदेश मंत्रालय का दो भागों में बंटा विशाल, ज्ञान और ऐतिहासिक साक्ष्यों से समृद्ध पुस्तकालय एवं अभिलेखागार अपने अंदर मध्यप्रांत काल से अब तक का प्रशासकीय इतिहास समेटे है। इस पुस्तकालय में आजादी के पूर्व मध्यप्रांत काल की पुस्तकें और दस्तावेज भी उपलब्ध हैं, जिसमें महाकौशल स्टेट, विन्ध्य प्रदेश स्टेट और रीवा स्टेट काल के 1918, 1929 से लेकर मध्यप्रदेश के गठन 1956 तक के कई अभिलेख मौजूद हैं। यहां जनगणना, विश्वकोष सहित अन्य कई महत्वपूर्ण विषयों से संबंधित पुस्तक भण्डार से देशभर के शोधार्थी मध्यप्रदेश के पूर्व मध्यप्रांत काल की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रहे हैं।
ब्रिटिश अधीन प्रांत था मध्यप्रांत
मध्यप्रांत (सेन्ट्रल प्रोविंस) ब्रिटिश आधीन भारत का एक प्रांत था। यह प्रांत मध्य भारत के उन राज्यों से बना था, जिन्हें अंग्रेजों ने मराठों एवं मुगलों से जीता था। इस प्रांत की राजधानी नागपुर थी। उस समय यहां के मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल थे।
अधिकारी और संदर्भ पुस्तकालय अलग-अलग
मप्र मंत्रालय पुस्तकालय दो भागों में बंटा है। पहले अधिकारी पुस्तकालय में हर विषय की पुस्तकें संकलित हैं। वहीं संदर्भ पुस्तकालय में अधिनियम, संहिता, नियमावली, रिपोट्स आदि शासकीय एवं अशासकीय कामकाज के प्रकाशन उपलब्ध हैं, जिन्हें विभिन्न विभागों द्वारा आवश्यकता पडऩे पर संदर्भ के रूप में उपयोग किया जाता है। पुस्तकालय रजिस्टर के अनुसार यहां 27705 पुस्तकें उपलब्ध हैं। 1971 के बाद खरीदी पुस्तकों का प्रतिवर्ष भौतिक सत्यापन होता है। इन पुस्तकों के अलावा यहां गजट, रिपोर्ट, जनगणना, भारत के शाही गजट, मप्र उच्च न्यायालय के आदेश, ए.आई.आर., सर्वोच्च न्यायालय के मामले, 1997 से अब तक के बजट, समय-समय पर प्रकाशित विनियोग लेखे एवं विभागों से आए प्रतिवेदनों का संकलन भी यहां है।
शोधार्थियों से लिए जाते हैं 1500 रुपये
पुस्तकों और अभिलेखों के अध्ययन के लिए मंत्रालय पुस्तकालय के अधीन अभिलेखागार कक्ष में व्यवस्था की गई है। यहां शोधार्थियों के लिए शोध की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। हालांकि शोधार्थियों से 1500 रुपये सुरक्षा निधि के रूप में लिए जाते हैं।
अभिलेखों को छग भी कर रहा स्केन
मंत्रालय के अभिलेखागार में विभिन्न विभागों का लगभग ढाई करोड़ पृष्ठ संख्या का रिकार्ड उपलब्ध है, जिसे ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर के के.एम.एस. पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। डिजिटल अभिलेखों को ऑनलाइन सर्च कर देखा जा सकेगा। मप्र के अलावा वर्ष 2000 के पहले अभिभाजित मध्यप्रदेश काल के दस्तावेजों को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी स्केन कराकर उनका अलग से डिजीटलीकरण कराया जा रहा है। यह काम सतपुड़ा भवन में जारी है।
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