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पॉलीथिन पर प्रतिबंध सिर्फ अभियान तक सीमित!
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- मप्र में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, सरकारी आदेश भूले अधिकारी!
- शहर की दुकानों, ठेले, गुमटियों पर पॉलीथिन में मिल रहा सामान
भोपाल। राजधानी में पॉलीथिन पर प्रतिबंध सिर्फ अभियानों तक सिमटकर रह गया है। स्वयं की सुविधा और व्यवस्था के हिसाब से निगम दस्ता दो-चार महीने में एक बार कुछ स्थानों पर छापेमारी कर पॉलीथिन जब्त करता है, इसके बाद लम्बे समय तक कार्रवाई नहीं होती। इस कारण पॉलीथिन कारोबारी और पॉलीथिन के सहारे फल-सब्जी, परचूनी, रेस्टोरेंट, कपड़ा आदि का कारोबार करने वाले खुदरा व्यवसायी बेधडक़ पॉलीथिन में सामान बेच रहे हैं।
मप्र में 8 साल से प्रतिबंधित पॉलीथिन व सिंगल यूज प्लास्टिक
मप्र शासन ने जैव अनाश्य अपशिष्ट (नियंत्रण) अधिनियम, 2004 में संशोधन कर 24 मई 2017 को जारी अधिसूचना के माध्यम से पूरे मप्र में प्लास्टिक थैलियों के उत्पादन, भण्डार, परिवहन, विक्रय एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है। भारत सरकार के सिंगल यूज प्लास्टिक को वर्ष 2022 तक पूरी तरह बाहर (फेस आउट) करने के संकल्प के परिप्रेक्ष्य में मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के माध्यम से मप्र सरकार ने 4 जून 2019 से सभी शासकीय कार्यालयों में आयोजित होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित किया था। 1 जुलाई 2022 से केन्द्र ने पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया था। मप्र में भी इसे लागू किया गया। आदेश के उल्लंघन करने पर 500 से लेकर 5000 रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान है।
बाजार में बिक रहे प्रतिबंधित प्लास्टिक सामान
सिंगल यूज प्लास्टिक से बने जिन दैनिक खाद्य एवं उपयोग की सामग्री और सजावटर सामान को केन्द्र व राज्य सरकार ने प्रतिबंधित किया है, वह बाजार में दुकानों पर खुलेआम बिक रहे हैं। लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। हाट बाजार, गुमटियों और ठेलों पर प्लास्टिक की प्लेट-चम्मच ग्राहकों को दी जा रही हैं। थार्मोकॉल और प्लास्टिक से बनी प्लेट, चम्मच, गिलास आसानी से दुकानों पर खरीदे-बेचे जा रहे हैं। कार्रवाई के अभाव में दुकानदार बेखौफ होकर इसकी बिक्री कर रहे हैं।
दैनिक उपयोग के प्लास्टिक सामान पर प्रतिबंध
गुब्बारों में लगी प्लास्टिक की डंडी, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, थर्मोकोल से बनी सजावट, प्लास्टिक की प्लेटें, कप, गिलास, चम्मच, चाकू, ट्रे, प्लास्टिक के स्ट्रॉ, पॉलीथिन बैग, सजावटी प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री के अलावा प्लास्टिक कटलरी, प्लास्टिक स्टिक वाले ईयरबड्स, और मिठाइयों व निमंत्रण कार्डों की कुछ पैकिंग फिल्में।
सरकारी टेबिलों पर पहुंची प्लास्टिक बोतलें
मप्र सरकार ने 4 जून 2019 को सभी शासकीय कार्यक्रमों, बैठकों और कार्यालयों में प्लास्टिक की बोतल में पानी पर प्रतिबंध लगाया था। कई शासकीय कार्यक्रमों में अतिथियों के लिए कांच की बोतलों में पानी परोसा जाने लगा था। यह आदेश कोरोना के पहले तक मार्च 2020 तक सख्ती से पालन हुआ। लेकिन कोरोना के बाद धीरे-धीरे अधिकांश शासकीय कार्यक्रमों, बैठकों और अतिथियों की टेबिलों पर प्लास्टिक की बोतलें ही नजर आने लगी हैं।
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