राजधानी

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लोकायुक्त जांच में फंसी महिला अधिकारी को बना दिया कलेक्टर

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-मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव हैं पति

-पद के दुरुपयोग के मामले में उच्च न्यायालय लगा चुका है 25 हजार रुपए का जुर्माना

भोपाल। राज्य शासन ने पिछले सप्ताह जारी आईएएस अधिकारियों के तबादला आदेश में 12 जिलों के कलेक्टर बदले थे। जिनमें से 7 जिलो में महिला अधिकारियों को कलेक्टर बनाकर भेजा गया। इनमें से पन्ना कलेक्टर बनाकर भेजी गईं ऊषा परमार के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज है। साथ ही भ्रष्टाचार एवं पद के दुरुपयोग के मामले में मप्र उच्च न्यायालय 25 हजार रुपए का जुर्माना लगा चुका है। 

ऊषा परमार को पन्ना कलेक्टर बनाए जाने को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा इस बात की है कि लोकायुक्त जांच एवं भ्रष्टाचार की शिकायत को नजरअंदाज करके कलेक्टर क्यों बनाया गया? हालांकि इसके पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि ऊषा परमार के पति अरुण परमार मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव हैं। वे सिंगरौली कलेक्टर रह चुके हैं। ऊषा परमार भोपाल संभाग की उपायुक्त राजस्व रह चुकी हैं। मप्र के लोकायुक्त ने ऊषा परमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कर 7 दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इतना ही नहीं उपायुक्त रहते मप्र उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले में उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और मुख्य सचिव, भोपाल को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया। हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले में कोई खास कार्रवाई नहीं की। उच्च न्यायालय के पत्र का हवाला देकर सामान्य प्रशासन विभाग की अवर सचिव फरहीन खान ने आयुक्त भोपाल संभाग को पत्र लिखकर ऊषा परमार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस मामले में भी केाई कार्रवाई नहीं की गई।