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पेड़ों को पानी पिलाने कोलार मार्ग के सेंट्रल वर्ज के बीच बिछी पाइप लाइन
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भोपाल। कोलार गेस्ट हाउस तिराहे से गोल जोड़ तक बनकर तैयार हुई 15 किमी लम्बी कोलार सिक्स लेन के बीच सेंट्रल वर्ज को हरा-भरा रखने के लिए पानी की पाइप लाइन बिछाई जा रही है। दो महीने पहले बारिश में रोपे गए पौधों को सूखने से बचाने के लिए नगर निगम द्वारा यह लाइन डाली जा रही है।
उल्लेखनीय है कि 15 किमी लम्बी कोलार सिक्सलेन सडक़ के निर्माण के लिए 1377 पेड़ों के पूर्व अनुमान के विपरीत तीन साल पहले रिकार्ड में 4105 पेड़ काटे गए थे। इन काटे गए पेड़ों की प्रतिपूर्ति के लिए यहां सेंट्रल वर्ज पर 15 करोड़ लागत से 20 हजार पेड़ सहित ग्रीन कॉरिडोर बनाए जाने की योजना है। खुले सेंट्रल वर्ज पर पशुओं के विचरण को देखते हुए डिवाईडर के दोनों ओर लोहे की ग्रिल लगाई गई है। वहीं यह पौधे सालभर जीवित रहकर वृद्धि कर सकें, इसके पाइप लाइन बिछाकर इन्हें नियमित पानी देने की तैयारी की जा रही है।
पेड़ों की कटाई पर एनजीटी ले चुका आपत्ति
कोलार सिक्सलेन के निर्माण में काटे गए कुल 4105 पेड़ों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भी आपत्ति लेकर लोक निर्माण विभाग, नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर चुका है। यह कार्रवाई पेड़ों को बिना अधिकारिक अनुमति के काटे जाने को लेकर लगाई गई याचिका पर जारी हुए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पेड़ों को काटने के लिए सहायक आयुक्त उद्यानिकी द्वारा दी गई अनुमति अवैध है। इस पर भोपाल नगर निगम के अधिकारियों का तर्क था कि आदेश वृक्षाअधिकारी द्वारा ही दी गई। सहायक आयुक्त ने सिर्फ आदेश का संप्रेषण किया, लेकिन निगम की ओर से कोई स्पष्ट आदेश या सोच-विचार का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। याचिकाकर्ता ने इसे अवैध अनुमति बताते हुए इसका रिकार्ड नहीं होने का भी आरोप लगाया।
6-8 फीट तक ऊचाई के रोपे गए पौधे
कोलार रोड़ की सेंट्रल वर्ज पर कोलार गेस्ट हाउस से सर्वधर्म पुल तक पिछले वर्ष की बारिश में भी पौधे रोपे गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में इनमें से एक भी जीवित नहीं बचा। ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत इस बार भी सेंट्रल वर्ज पर जो पौधे रोपे गए हैं, उनकी लम्बाई 6-8 फीट तक की है। इस बार रोपे गए अधिकांश पौधे जिंदा जरूर हैं, लेकिन दो फीट गहराई के अंदर सडक़ निर्माण ठेकेदार द्वारा भरे गए डामर और सीमेंट-कंकरीट के चलते यह आसानी से वृद्धि कर पाएंगे, इसकी संभावना कम ही है। क्योंकि पिछली वर्ष पौधों की हालत को देखते हुए विभाग ने इस बार सेंट्रल वर्ज पर अलग से मिट्टी डलवाई है।