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मध्यप्रदेश
बचेंगे नहीं मासूमों की मौत के दोषी: शुक्ल
मध्यप्रदेश
उद्देश्य सिर्फ दोषियों को सजा नहीं, घटना की पुनरावृत्ति रोकना
भोपाल। जहरीली खांसी की दवाओं से हमारे राज्य के 20 छोटे-छोटे मासूम बच्चों के निधन की घटना दर्दनाक है। हर एक दिवंगत बच्चा हमारे लिए अनमोल था और उनकी मौत ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। मैं भरोसा दिलाता हँॅ कि मप्र सरकार दोषियों को छोडग़ी नहीं। सरकार ने अस्पताल में भर्ती मासूमों के उपचार, मासूमों के मौत के कारणों, घटना की जांच और प्राथमिक जांच में सामने आए आरोपियों पर तुरंत ही सख्त कार्रवाई शुरू कर दी थी। जहरीली खांसी की दवा से हुई मासूमों की मौत के बाद सरकार के सख्त कदम की जानकारी देते हुए यह बात मप्र के उप मुख्यमंत्री (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) राजेन्द्र शुक्ल ने कही है।
मंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि जिस खांसी की दवा से मप्र में मासूमों की मौत की यह दुखद घटना हुई, वह तमिलनाडु की एक फैक्ट्री श्रीसन मेन्यूफेक्चरिंग कंपनी में बनाई गई थी। दवा के उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी और निरीक्षण की जिम्मेदारी तमिलनाडु राज्य के औषधि विभाग की थी। उन्होंने कहा कि हर कंपनी को एक गुणवत्ता नियंत्रण विभाग बनाना होता है, जो उत्पादन के हर चरण पर निगरानी रखता है। हानिकारक तत्वों की पहचान के लिए कंपनी के इस विभाग द्वारा दवा निर्माण के दौरान तीन स्तरों पर नमूनों की जांच की जाती है। कंपनी के लिए हर बैच के रिकॉर्ड भी सहेजकर रखना अनिवार्य है। राज्य सरकारों की भी समय-समय पर फैक्ट्री के निरीक्षण की जिम्म्ेदारी है। लायसेंसिंग अथोरिटी के तहत सरकार को सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करना होता है। इस प्रकरण में चूंकि फैक्ट्री तमिलनाडु में थी, इसलिए उस फैक्ट्री के निरीक्षण, लाइसेंस और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी वहीं की राज्य सरकार की थी। फिर भी मप्र सरकार तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर दोषियों को सजा दिलाने और सिस्टम में सुधार लाने के लिए लगातार संपर्क में हैं। उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि भविष्य में इस त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकना है। इसलिए मप्र में बिकने वाली हर औषधि की जांच प्रक्रिया को और सख्त किया जा रहा है।
प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई
भमेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट, नागपुर से बच्चों की मौत की जानकारी मिलते ही सरकार ने अस्पताल में भर्ती बच्चों की जान बचाने हर संभव प्रयास किया। प्राथमिक जांच में मौत के कारण के रूप में सामने आईं तीन कप सिरप को प्रतिबंधित कर दोषी दवा कंपनी, चिकित्सक सहित अन्य दोषियों पर कार्रवाई की गई। दवाओं को प्रतिबंधित कर प्रदेशभर में इनकी बिक्री, भण्डारण पर रोक लगई। मेडिकल स्टोर पर छापा मारे और 19 प्रकार की दवाओं जांच के लिए भेजा गया। दवा निर्माता कंपनी और दवा लिखने वाले डॉक्टर पर बीएनएस एवं आजीवन कारावास की सजा तक वाली ड्रग्स एण्ड कॉस्मेटिक्स अधिनियम की धाराओं में एफआईआर की गई। मप्र पुलिस द्वारा तमिलनाडू से कंपनी के निदेशकों की गिरफ्तारी की। इसके अलावा राज्य में बिकने वाली सभी दवाओं की जांच के आदेश जारी किए गए।
विभागीय समीक्षा बैठक में लिए निर्णय
- जिला एवं मुख्यालय स्तर पर खाद्य प्रयोगशालाओं के रिक्त पदों, फार्मेषी दुकानों, औषधि निर्माण इकाईयों, प्रयोगशालाओं आदि के लिए रिक्त पदों पर सीधी एवं पदोन्नति से भर्ती के निर्देश दिए गए। साथ ही आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के लिए राशि के प्रावधान के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा शिकायतों के लिए टोलफ्री नंबर जारी करने व लंबित प्रकरणों के विशेष न्यायालय से निपटान क ेलिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने जैसे निर्णय भी लिए गए।
क्या है औषधि परीक्षण और नमूना प्रक्रिया
- दवाओं की दोहरी जांच: ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा नियमित निरीक्षण और नमूने लेना एवं निर्माता द्वारा की जाने वाली अनिवार्य आंतरिक जांच।
- निरीक्षक द्वारा जांच व नमूने: औषधि निरीक्षक अपने क्षेत्र में स्थित औषधि निर्माण इकाइयों का नियमित रूप से निरीक्षण करे और जरूरत पडऩे पर नमूने लेकर परीक्षण कराए।
- निरीक्षक को हर लाइसेंस प्राप्त निर्माण इकाई का साल में एक बार निरीक्षण करना अनिवार्य है। वह निर्मित दवाओं या प्रसाधन सामग्री के नमूने लेकर टेस्ट या विश्लेषण के लिए भेजते हैं।
- आयुर्वेदिक, सिद्ध, यूनानी दवाओं के निर्माण स्थल का साल में कम से कम दो निरीक्षण अनिवार्य हैं।
- कंपनी को भी कच्चे माल से लेकर दवा निर्माण तक हर बैच या खेप की जांच करना अनिवार्य है।
- गुणवत्ता नियंत्रण विभाग की अनुमति के बाद ही दवा उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण किया जा सकता है।
- इंजेक्शन या जैविक उत्पादों के हर बैच की जांच स्वयं की परीक्षणशाला या किसी अनुमोदित बाहरी प्रयोगशला में जरूरी है।
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