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247 भू-माफिया, शराब माफिया पर दर्ज हुए 636 प्रकरण
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विगत वर्ष माफिया केन्द्रित रही मप्र पुलिस की कार्रवाई
भोपाल। पिछले एक साल में मध्यप्रदेश पुलिस की कार्रवाई मफिया केन्द्रित रही। भू-माफिया, रेत माफिया, राशन माफिया, मिलावट माफिया, शराब माफिया और चिटफंड जैसी गड़बडिय़ों पर जिन संबंधित विभागों को कार्रवाई करनी चाहिए, वे उदासीन बने रहे, लेकिन पुलिस इन सभी मामलों में कार्रवाई करती रही।
मप्र गृह विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 में 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच पुलिस ने भू-माफिया पर 247 प्रकरण पंजीबद्ध किए। जबकि जमीन संबंधी इन मामले में राजस्व विभाग को कार्रवाई की पहल करनी थी। इसी तरह एक साल में प्रदेशभर में रेत माफिया पर पुलिस ने 636 प्रकरण पंजीबद्ध किए। इस दौरान 664 चार पहिया वाहन और लगभग 20 हजार घनमीटर से अधिक अवैध रेत जब्त कर खनिज विभाग को सौंपा। पुलिस ने इस दौरान 446 वाहनों से अर्थदण्ड भी वसूला। जबकि रेत सहित अन्य खनिजों की चोरी एवं अवैध परिवहन रोकने का काम खनिज विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन का है।
राशन और खाद्यान्न की चोरी पर भी पुलिस की नजर
प्रदेशभर में शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से गरीबों को मुफ्त एवं नाममात्र की दरों पर वितरित किए जाने वाले राशन सहित अन्य खाद्यान्न की कालाबाजारी को भी पुलिस ने रोका और प्रकरण पंजीबद्ध किए। पिछले साल पुलिस ने राशन माफिया के खिलाफ 13 आरोपियों पर 9 प्रकरण पंजीबद्ध किए। इस काम के लिए मूल विभाग खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं स्थानीय जिला प्रशासन होता है।
पुलिस करवा रही मिलावट खोरों पर कार्रवाई
खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट की सूचना या संदेह पर खाद्य विभाग मिलावट खोरों पर कार्रवाई करता है। इसके बाद भी पुलिस ने 7 मिलावट खोरों पर 7 अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं। 4 आरोपियों की गिरफ्तारी कर 5.2 लाख रुपये कीमत का मिलावटी खाद्य पदार्थ भी जब्त किया है।
आबकारी से ज्यादा पुलिस से भयभीत शराब माफिया
आबकारी विभाग की उदासीनता और कहीं-कहीं अधिकारियों-कर्मचारियों मिलीभगत के चलते भी मप्र के हर शहर में शराब का अवैध कारोबार जारी है। पुलिस ने पिछले साल अवैध शराब माफिया पर कुल 98 हजार से ज्यादा प्रकरण पंजीबद्ध किए और 1.26 लाख से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों से पुलिस ने 15 लाख लीटर से अधिक अवैध देशी-विदेशी मदिरा भी जब्त की।
अवैध चिटफंड कारोबार पर पुलिस की नजर
मध्यप्रदेश में करीब 13 साल पहले वर्ष 2012 में लगातार कार्रवाई हुई थीं। मीडिया संस्थान खोलकर उसकी आड़ में चिटफंड एवं अन्य कई बड़े कारोबार संचालित करने वाले चिटफंड कंपनियों पर स्थानीय जिला प्रशासन ने पुलिस के सहयोग से छापे मारे गए। संचालक गिरफ्तार किए गए थे और इन कंपनियों से संबंधित संस्थानों पर ताले लगाए गए थे। इसके बाद भी अब तक यह कारोबार प्रदेश के अलग-अलग शहरों में चोरी-छिपे चल रहा है। स्थानीय जिला प्रशासन की उदासीनता के बीच पुलिस की नजर इस अवैध कारोबार पर निरंतर बनी हुई है। पिछले एक साल में पुलिस ने 13 आरोपियों के विरुद्ध 9 प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं।
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