राजधानी

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भोपाल नहीं बनेगा मांस की मंडी, पशुवध गृह होंगे बंद° गौमास को लेकर हंगामेदार रही निगम परिषद की बैठक, तीनों प्रस्ताव पास

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भोपाल। भोपाल में पशुवधगृह की आवश्यकता नहीं है। अनिवार्य नहीं कि निगम इन्हें चलाए। यहां भोपाल के लिए नहीं, बाहर के लिए पशुबद्ध किया जा रहा है। राजधानी को मांस की मंडी नहीं बनने देंगे। भोपाल में पशुवधगृह नहीं चलने देंगे। इस तरह की व्यवस्था मंगलवार को भोपाल निगम परिषद की बैठक में अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने आसंदी से दी। 

निगम से ब्लैकलिस्ट होगी गौवंश काटने वाली फर्म 

अध्यक्ष श्री सूर्यवंशी ने कहा कि भोपाल में पशुवध गृह मेंं गौवंश की हत्या से पूरा भोपाल शहर आक्रोशित है। इस अपराध को सहन नहीं किया जाएगा। जो भी अधिकारी-कर्मचारी या ठेकेदार दोषी होंगे वक्से नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर बर्खास्त किया जाएगा। उन्होंने निगमायुक्त को निर्देश दिए कि संचालक फर्म को निगम से जीवनपर्यांत ब्लैकलिस्ट किया जाए। 11 कर्मचारियों को निलंबित किया जाए। 

अध्यक्ष श्री सूर्यवंशी ने कहा कि जब राष्टवादी संगठनों ने प्रदर्शन और एफआईआर कराई तब तक निगम प्रशासन क्या करता रहा। तथ्यों की जांच के बाद निगम भी एफआईआर कराए। राजधानी में गौकशी बर्दास्त नहीं की जाएगी।  

बकरा-बकरी खाने वालों पर भी हो कार्रवाई 

गौमास प्रकरण पर स्पष्टकरण देते हुए महापौर मालती राय ने कहा कि निविदा से कार्यादेश तक की कार्रवाई एमआईसी के माध्यम से नहीं हुई।इस काम के छोटे से हिस्से को एमआईसी ने अनुमति दी। उन्होंने कहा कि भोपाल में किसी भी तरह का पशुवध गृह बंद होना चाहिए। बकरा हो या बकरी, खाने वालों पर कार्रवाई होना चाहिए। एमआईसी ने गाय काटने की अनुमति नहीं दी है। बल्कि खुद मांग कर रही है कि गाय काटने वालों पर कार्रवाई हो। 

एमआईसी पर कार्रवाई के लिए अड़ा रहा विपक्ष 

विपक्ष का आरोप था कि स्लॉटर हाउस के संचालन को 25 अक्टूबर 2025 को एमआईसी ने मंजूरी दी।इसलिए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ महापौर एवं एमआईसी पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। सत्तापक्ष का कहना था कि स्लॉटर आउस का प्रस्ताव 2022 में उस समय आया था जब निगम परिषद का गठन नहीं हुआ था।एमआईसी ने सिर्फ एक चरण को आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी। हालांकि एमआईसी ने गौहत्या की अनुमति नहीं दी थी। अध्यक्ष का कहना था कि जब शासन स्तर की कमेटी जांच करेगी तो उसमें सभी पक्षों की जांच होगी। लेकिन विपक्ष नहीं माना, भोजन अवकाश के पहले तक विपक्ष ने पहले आसंदी घेरकर प्रदर्शन किया। बाद में सदन में धरना देकर नारेबाजी की। भोजन अवकाश के बाद अध्यक्ष ने प्रस्तावों पर चर्चा शुरू कराई तो विपक्ष ने बर्हिगमन कर दिया। 

विपक्ष के बहिर्गमन के बीच तीनों प्रस्ताव पास

भोजन अवकाश के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने बहिर्गमन कर दिया। इसके बाद 829 कॉलोनियों में बल्क कनेक्शन के स्थान पर व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन दिए जाने, विवाह पंजीयन शुल्क में कटौती एवं केंद्र की अमृत 2.0 योजना मेंग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के माध्यम से अंशदान जुटाए जाने संबंधी प्रस्ताव बहुमत से पारित हुए। 

विपक्ष की मंशा अधिकारियों को ब्लैकमेल करना

प्रस्तावों के पास होने के बाद महापौर श्रीमती मालती राय ने अपने संबोधन में कहा कि विपक्ष का फोकस उनके वार्डों के विकास पर नहीं, अधिकारियों पर दबाव बनाने बनाने पर रहता है। प्रयास होता है कि कैसे अधिकारियों को ब्लैकमेल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष नहीं चाहता था कि ये प्रस्ताव पास हों और मुफ्त का पानी लेने नहीं चाहते कि सीवेज और नल कनेक्शन का पैसा देना पड़े। ये लोग नहीं चालते कि विवाह पंजीयन हो, क्योंकि विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र तो सिर्फ एक ही विवाह का बनेगा।  

भाजपा पार्षद का इस्तीफा, अध्यक्ष ने किया अस्वीकार 

स्लॉटर हाउस में गौवध के विरोध में जेकेट पर ‘कटती गैया करे पुकार, बंद करो ये अत्याचार’ लिखे पर्चे चिपकाकर पहुंचे भाजपा पर्षद देवेन्द्र भार्गव ने आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने के विरोध में इस्तीफा दे दिया। हालांकि अध्यक्ष श्री सूर्यवंशी ने उसे अस्वीकार कर दिया। भार्गव का कहना था कि गौमाता के लिए कई पार्षदी कुर्बान कर सकता हँू। 

पशु चिकित्सक और 11 कर्मचारी निलंबित 

पशुवध गृह में गौकशी मामले में सत्ता और विपक्ष दोनों के ही पार्षदों ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। सत्तापक्ष के विधायकों की मांग थी कि दोषियों को फांसी की सजा दिलाई जाए। अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने दोनों पक्षों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इसमें कोई दोषी नहीं बचेगा। पहले उन्होंने संयुक्त कमेटी गठन के लिए दोनों पक्षों से सदस्यों के नाम मांगे, लेकिन विपक्ष की आपत्ति के बाद उन्होंने शासन स्तर से कमेटी गठित कर जांच कराने की व्यवस्था दी। जानकारी दी गई कि निगम के चिकित्सक बेनी प्रसाद गौर को निलंबित किया गया है। साथ ही पशुवधगृह की व्यवस्था से जुड़े सभी 11 कर्मचारियों पर भी तुरंत निलंबन की कार्रवाई के निर्देश निगमायुक्त संस्कृति जैन को दिए। निगमायुक्त ने अध्यक्षीय व्यवस्था के तुरंत पालन की बात स्वीकारी। इन सभी कर्मचारियों (सभी मुस्लिम) के नाम एमआईसी सदस्य रविन्द्र यति ने पढक़र सुनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भोपला मध्य विधानसभा के एक नेता को बचाने के लिए विपक्ष झूठ बोलकर कार्रवाई को बाधित कर रहा है।