राजधानी
मोहल्लों से ज्यादा कॉलोनियों में श्वान प्रेमी, घर में विदेशी नश्लों के डॉग, दरबाजे पर देसी कुत्तों के घरौंदे, श्वानों की एबीसी के नाम पर निगम में फर्जीवाड़ा!
राजधानी
भोपाल। मासूमों पर आवारा श्वानों के हमलों के बीच सर्वोच्च न्यायालय की सख्ती राजधानी भोपाल में असर होता नजर नहीं आ रहा है। शहर की पॉश कॉलोनियों में रह रहे श्वान प्रेमी घरों में विदेशी नश्लों को और दरवाजे पर देसी आवारा श्वानों के लिए घरौंदा बनाकर बसा रहे हैं। आवारा श्वानों को पकडऩे आ रही निगम टीमों को बहला-फुसलाकर अथवा रिश्वत देकर भी खाली हाथ वापस लौटाया जा रहा है। वहीं शहर में लगातार बढ़ती श्वानों की संख्या निगम के नशबंदी (एबीसी) केन्द्रों में हो रहे फर्जीवाड़े को उजागर कर रही है।
घर के बाहर क्यों पाले जा रहे कुत्ते
शहर की पॉश कॉलोनियों में निवासरत अधिकांश लोग पशु अथवा श्वान प्रेमी नहीं हैं। दरवाजों पर घौंसले बनाकर, उन्हें बचा हुआ भोजन खिलाकर पाला जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण रात में चोरों से घर की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। घरों में विदेशी नश्लों की अपेक्षा देसी नश्लों के श्वान आहट पर भौंककर जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं।इनके रख-रखाव और पालने पर अधिक राशि भी खर्च नहीं करनी पड़ती।
नशबंदी हुई तो कहां हैं कान कटे कुत्ते?
शहर में आवारा श्वानों की संख्या पर अंकुश लगाने और उनकी आक्रामकता कम करने भोपाल के काजलखेड़ा, आदमपुर और अरवलिया स्थित एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटरों में कुत्तों की नशबंदी और एंटी रैबीज टीकाकरण किया जाता है। लेकिन वर्तमान में ज्यादातर टीकाकरण कागजों में दिखाया जा रहा है। निगम जिस भी कुत्ते का टीकाकरण करता है, उसे चिन्हित करने के लिए कुत्ते के एक कान को काट दिया जाता है। शहर की कॉलोनियों में हजारों की सख्या में ऐसे कुत्ते नजर आ रहे हैं, जिनके कान कटे हुए नहीं हैं।
श्वान पर सवालों से प्रभारी को चिढ़
नगर निगम, भोपाल की श्वान शाखा के प्रभारी, निगम के अपर आयुक्त हर्षित तिवारी न तो श्वान दस्ते द्वारा पकडक़र एवं रिश्वत लेकर छोड़े गए श्वानों की शिकायतें सुनना पसंद करते हैं और न ही वे इस तरह के सवाल पर प्रतिक्रिया ही देना पसंद करते हैं। श्री तिवारी आवारा श्वानों को लेकर सवाल करने वालों के मोबाइल नंबर ही ब्लॉक लिस्ट में डाल देते हैं।
शहर में करीब डेढ़ लाख आवारा श्वान
अनुमान के अनुसार राजधानी में वर्तमान में करीब 1.30 लाख से 1.50 के बीच आवारा श्वान हैं। भोपाल शहर में इन आवारा श्वानों के हमले में वर्ष 2024 में लगभग 19 हजार से अधिक बच्चे घायल हुए थे। 2025 में भी कुत्ते के काटने से घायल हुए लोगों की संख्या लगभग इतनी ही थी। कुत्तों के काटने की घटनाएं ज्यादातर बच्चों के साथ हुई।
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