राजधानी

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अधिकांश मामलो में शासन से नहीं मिली चालान की अनुमति

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36 साल की नौकरी में आईएएस थेटे पर दर्ज हुए भ्रष्टाचार के 27 मामले 


भोपाल। भारतीय प्रशासनिक, पुलिस और वन सेवा के कई अधिकारियों के विरुद्ध पिछले एक-दो दशक तक से लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में भ्रष्टाचार के एक से अधिक प्रकरण पंजीबद्ध हैं। लेकिन इनमें कहीं धीमी जांच तो कहीं, शासन से चालान पेश करने की अनुमति नहीं मिल पाने से कार्रवाई नहीं हो पा रही है। सेवानिवृत्त आईएएस रमेश थेटे के विरुद्ध 36 साल की नौकरी में लोकायुक्त और ईओडब्ल्यु में भ्रष्टाचार के कुल 27 प्रकरण पंजीबद्ध हुए। इनमें आय से अधिक संपत्ति का एक प्रकरण सेवानिवृत्ति के बाद दर्ज हुआ।  लेकिन सेवानिवृत्ति के 5 साल बाद भी अधिकांश मामलों में न्यायालय में आरोप पत्र पेश करने की अनुमति शासन से नहीं मिल सकी। 

भ्रष्टाचार के एक मामले में जिला न्यायालय द्वारा तय किए गए आरोपों के विरुद्ध उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में प्रस्तुत की गई रिवीजन याचिका के खारिज होने के बाद एक बार फिर से चर्चाओं में आए रमेश थेटे के विरुद्ध लंबित दो दर्जन से अधिक भ्रष्टाचार के प्रकरणों पर भी चर्चा शुरु हो गई है। 1993 में आईएएस बने थेटे की पदस्थापना एक साल के बाद हुई। उन्होंने करीब 36 साल नौकरी की और वे वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुए। हालांकि पूरे सेवाकाल के दौरान वे एक बार भी कलेक्टर नहीं बन सके। शासकीय सेवा में रहते हुए भी लगातार सरकार के खिलाफ बयानवाजी और भाषणवाजी करते रहे थे, लेकिन फिर भी थेटे के विरुद्ध दर्ज भ्रष्टाचार के प्ररकणों में सरकार की ओर से न्यायालय में आरोप पत्र पेश करने की अनुमति भी नहीं दी गई। सेवानिवृत्ति के बाद भी थेटे लगातार सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं। 


सेवानिवृत्ति के बाद भी लोकायुक्त में हुई एफआईआर 

आईएएस रमेश थेटे और उनकी पत्नी पर लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज हो चुकी है। लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति मामले में 20 साल बाद उन पर एफआईआर दर्ज की। लोकायुक्त ने जांच में पाया था कि रमेश थेटे ने स्वयं औरपत्नी मंदा थेटे के नाम पर 68 अलग-अलग बैंकों से लोन लिया था और साल 2012-13 में इस लोन को अल्प अवधि में वापस जमा भी कर दिया था। जांच में तत्कालीन आय के परिप्रेक्ष्य में अनुपातहीन संपत्ति होना पाया गया है। इसी आधार पर थेटे दंपत्ति पर लोकायुक्त ने नई एफआईआर दर्ज की थी।


भ्रष्टाचार मामले में थेटे की याचिका खारिज 

भ्रष्टाचार के एक मामले में आईएएस रमेश थेटे सहित अन्य अधीनस्थ अधिकारियों पर पुलिस द्वारा दर्ज प्रकरण में जिला न्यायालय द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद इसके विरुद्ध थेटे ने उच्च न्यायालय इंदौर में पुनरीक्षण याचिका लगाई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने हाल में खारिज कर दिया। थेटे के अलावा तत्कालीन तहसीलदार आदित्य शर्मा, पटवारी मनोज तिवारी एवं अन्य के पर आरोप था कि इन्होंने अपने अधिकारों के दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया। याचिका की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अधिकारियों की यह याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि न्यायालयीन सुनवाई के दौरान कुछ भी गलत नजर नहीं आता।