मध्यप्रदेश

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फर्जी बिलों से 20.47 करोड़ के गबन पर बीईओ को नोटिस, सरकारी खजाने को चपत लगाने वाले दो अधिकारियों पर ईडी ने दर्ज किए प्रकरण

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भोपाल/इंदौर, विशेष संवाददाता। प्रवर्तन निदेशालय, इंदौर ने पूर्व में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के आधार पर दो अलग-अलग प्रकरणों पर स्वत: संज्ञान लेकर आरोपियों के विरुद्ध धनशोधन अधिनियम में एफआईआर की है। 

ब्लॉक शिक्षा कार्यालय, कठ्ठीवाड़ा, जिला अलीराजपुर में सरकारी फंड से 20.47 करोड़ रुपये के फर्जी बिल पास कर धोखाधड़ी एवं गबन मामले में आरोपी बीईओ कमल राठौर एवं 5 अन्य आरोपीयों के विरुद्ध विशेष न्यायाधीश पीएमएलए इंदौर, के समक्ष अभियोजन शिकायत दायर की है। 6 जनवरी 2026 को न्यायालय ने आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए हैं। 

पुलिस की एफआईआर पर लिया संज्ञान 

ईडी ने पुलिस स्टेशन कठ्ठीवाड़ा, जिला अलीराजपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की। इसके बाद भादंवि1860, आईटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों के लिए चार्जशीट दायर की गई। यह मामला अप्रैल 2018 से

जुलाई 2023 की अवधि के दौरान बीएलओ, कठ्ठीवाड़ा के खजाने से कुल 20.47 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी का है। आरोपियों ने गबन और घोटाला विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित सरकारी फंड में किया। जांच में पता चला कि कमल राठौर एवं अन्य आरोपियों ने लगभग पांच साल की अवधि में करोड़ों रुपये की बड़ी रकम का व्यवस्थित तरीके से गबन किया है।

छापे में जब्त किए दस्तावेज, 25 लाख रुपये 

इससे पहले, पीएमएलए 2002 की धारा 17 के तहत ईडी ने तलाशी अभियान चलाए।जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए और 25 लाख रुपये फ्रीज किए गए। मुख्य आरोपी, कमल राठौर को ईडी ने 7 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया था। आगे की जांच में पता चला कि आरोपियों ने इस घोटाले से अर्जित राशि से कई अचल संपत्तियां खरीदीं। ईडी ने आरोपियों से संबंधित 4.3 करोड़ रुपये मूल्य की 14 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से की हैं। 

संभागीय उप निदेशक ने कमाई करोड़ो की अवैध संपत्ति 

ईडी, इंदौर ने लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा दर्ज एफआईआर और आरोप पत्र के आधार पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संभागीय उप निदेशक अशोक शर्मा के विरद्ध अभियोजन शिकायत दायर की है। आरोप है कि शर्मा ने पद पर रहते अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से काफी अधिक संपत्ति जमा की।

ईडी की जांच में पता चला कि 1998 से 2010 की अवधि के दौरान, आरोपी ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करके 1.64 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की। आरोप है कि इन अवैध निधियों को परिवार के सदस्यों के कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया और विभिन्न अचल संपत्तियों को खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया, जिससे अपराध की आय को बेदाग संपत्ति के रूप में दिखाने का प्रयास किया गया। ईडी ने पहले 25 मार्च, 2025 को एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया था, जिसमें परिजनों के नाम की 95 लाख रुपये कीमत की तीन अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया था। 

निगम के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पर भी एफआईआर 

इंदौर नगर निगम के तत्कालीन सहायक स्वास्थ्य अधिकारी राजेश कोठारी पर पूर्व में हुई लोकायुक्त की कार्रवाई में दर्ज आरोप पत्र के आधार पर ईडी विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई है। लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा कोठारी के विरुद्ध दर्ज एफआईआर में कोठारी पर इंदौर नगर निगम में सहायक स्वास्थ्य अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी और निष्कासन अधिकारी के पदों पर रहते हुए भारी भ्रष्टाचार कर परिवार के सदस्यों के नाम पर विभिन्न चल और अचल संपत्तियां अर्जित के आरोप थे। चार्जशीट में उनके व परिजनों के नाम पर 2,51,86,444 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई थी।ईडी की जांच में सामने आईं 1,30,91,803 रुपये कीमत की दो संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया था।