मध्यप्रदेश

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दिवंगत आईएएस अरविंद जोशी व परिजनों की 5 करोड़ की संपत्ति अटैच, 8.50 करोड़ की संपत्तियां ईडी पहले ही अटैच कर चुकी है ईडी

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भोपाल। जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव पद पर रहते हुए किए गए भ्रष्टाचार के मामले में निष्कासित, दिवंगत आईएएस अरविंद जोशी एवं उनके परिजनों की 5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की संपत्तियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल ने अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। इसके पहले भी तीन बार में उनकी साढ़े आठ करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। अब भोपाल में उनके नाम पर मौजूद रिसॉर्ट सहित अन्य संपत्तियों को अटैच किया गया है। 

41.87 करोड़ की अवैध संपत्ति जुटाने का आरोप

ईडी ने अरविंद जोशी के विरुद्ध लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इस जांच में जोशी पर जुलाई 1979 से 10 दिसंबर 2010 की अवधि के दौरान आय के स्रोतों से 41.87 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित करने का आरोप था। पीएमएलए 2002 के अंतर्गत की गई जांच में पाया कि जोशी के द्वारा संगठित प्लेसमेंट और अवैध आय के जरिये कई चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया और इसके माध्यम से उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर अवैध आय की परतों का पता चला।

जोशी ने परिजनों के नाम खरीदी थी बेनामी संपत्तियां

ईडी की जांच में सामने आया कि अरविंद जोशी ने एसपी कोहली और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बेनामी संपत्तियां खरीदी थीं। जोशी ने एक फर्जी कंपनी भी खोली थी और एसपी कोहली को उसका प्रबंधक बनाकर और उनके नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी जारी करके उसके नाम पर संपत्तियां जुटाई थीं।

यह संपत्तियां हुईं अटैच

ईडी इस प्रकरण में जोशी एवं परिजनों से जुड़ी तीन संपत्तियों को पहले ही अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है। कुर्क की गई इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 8.50 करोड़ रुपए है। अब कुर्क की गई संपत्तियों में आवासीय भूखंड, कृषि भूमि और भोपाल जिले में स्थित एक चालू रिसॉर्ट शामिल हैं जो अरविंद जोशी, उनके परिवार के सदस्यों और उनके सहयोगी एसपी कोहली के नाम पर है। इसे ईडी ने अपराध की आय मानते हुए अटैच करने की कार्यवाही की है।

पूर्व प्रभारी प्राचार्य के विरुद्ध अभियोजन शिकायत दर्ज 

आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भोपाल ने शासकीय बी. एड कॉलेज, छतरपुर के तत्कालीन प्राचार्य संतोष कुमार शर्मा सहित अन्य के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत विशेष पीएमएलए न्यायालय, भोपाल में अभियोजन शिकायत दायर की है। आरोपियों के खिलाफ पूर्व संज्ञान (प्री-कॉग्निजेंस) सुनवाई के लिए नोटिस भी जारी किया गया है। ईडी ने आरोपियों के विरुद्ध यह जांच लोकायुक्त द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1)(ई) आर/डब्ल्यू 13 (2) के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। ईडी की जांच में पता चला कि संतोष कुमार शर्मा ने लोकसेवक के पद पर रहते पद का दुरुपयोग किया और अपनी ज्ञात स्रोतों से काफी अधिक 1 करोड़, 23 लाख, 32 हजार 057 रुपये की संपत्ति अर्जित की। अनुचित आय का लाभ उन्होंने परिजनों को भी दिया। जांच के दौरान, ईडी ने 29 अगस्त 2025 को एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी कर 1,19,09,000 रुपये की अचल संपत्ति और 3,52,571 रुपये की चल संपत्ति, कुल मिलाकर

1,22,61,571/- रुपये की संपत्ति कुर्क की गई। जांच अवधि के दौरान, आरोपी ने 1,30,27,494 रुपये की वैध आय अर्जित की, जबकि उसका कुल खर्च और निवेश

2,53,59,551/- रुपये आंका गया, जिसके परिणामस्वरूप 1,23,32,057/- रुपये की अनुपातहीन संपत्ति हुई, जो कि उसकी वैध आय से लगभग 95 प्रतिशत अधिक है। आरोपी ने अपनी पत्नी एवं अन्य परिजनों के नाम से भी कई चल-अचल संपत्तियां खरीदीं। 

धोखाधड़ी मामले में ईडी ने बैंकों को वापस दिलाए 45 करोड़

ईडी ने मेसर्स जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक धोखाधड़ी मामले में बैंकों को लगभग 45 करोड़ रुपये वापस दिलाने में मदद की।ईडी, भोपाल जोनल ऑफिस ने तीन अटैच की गई संपत्तियों के बदले केनरा बैंक के पक्ष में लगभग 45 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्तियों को वापस दिलाने में मदद की है।

यह वापसी मेसर्स जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले से हुई है। जिसमें सीबीआई, बीएस एंड एफसी, नई दिल्ली ने पीसी एक्ट की धारा 13 और आईपीसी, 1860 की धारा 120बी के साथ धारा 420 के तहत मेसर्स जेएएमडब्ल्यू, इसके निदेशकों पुष्पेंद्र सिंह, उनके परिवार के सदस्यों और बैंक अधिकारियों के खिलाफ केनरा बैंक को धोखा देने और धोखाधड़ी करने के लिए मामला दर्ज किया था, जिससे लगभग 18.32 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ।केनरा बैंक ने 9 जनवरी 2025 को पीएमएलए की धारा 8(8) के तहत अटैच की गई संपत्तियों को वापस पाने के लिए एक एप्लीकेशन दायर की। सभी पक्षों को सुनने के बाद, माननीय स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए), जबलपुर ने 29 जनवरी 2026 को एक आदेश पारित किया, जिसमें पीड़ित बैंक के पक्ष में संपत्तियों [जिनकी मौजूदा मार्केट वैल्यू लगभग 45 करोड़ रुपये है को वापस करने का निर्देश दिया गया।