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कोडिय़ों के भाव सौंप दी करोड़ों की भूमि

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शासकीय भूमि के आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों पर मेहरबान रहे अधिकारी 

- महालेखापरीक्षा ने उजागर की गड़बडिय़ां, दोषियों पर नहीं हो सकी कार्रवाई 

भोपाल । मध्यप्रदेश में निजी शिक्षण संस्थानों को राजस्व की भूमि के आवंटन में नियमों को खूंटी पर टांग दिया। कहीं कलेक्टर ने ही कलेक्टर गाइडलाइन को अनदेखा किया, तो कहीं कलेक्टर के प्रस्ताव को दरकिनार कर राजस्व विभाग ने कम दरों पर भूमि का आवंटन कर दिया। इससे न केवल शासन को एक मुस्त मिलने वाले राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि वार्षिक पट्टा किराए की राशि का भी बड़ा नुकसान हुआ। 

प्रकरण-1 अजीम प्रेमजी फाउंडेशन 

महालेखा परीक्षा की जांच में पता चला कि भोपाल की हूजूर तहसील में राजस्व विभाग के दिसम्बर 2020 के आदेश से अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, बेंगलुरु को निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 20.234 हेक्टेयर भूमि 99 साल की अविध के लिए स्थायी पट्टे पर आवंटित की गई। शासन के आवंटन आदेश के अनुसार कलेक्टर ने बाजार मूल्य 109.26 करोड़ का अनुमोदन किया, जबकि पट्टा विलेख को 38.85 करोड़ के बाजार मूल्य पर जनवरी 2021 में निष्पादित किया गया और संस्थान ने बाजार मूल्य का 25 प्रतिशत 9.71 करोड़ प्रीमियम का भुगतान किया। स्वीकृत दरों से कम पर पट्टा विलेख किए जाने के कारण का भी अभिलेखों में उल्लेख नहीं किया गया। यह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास पर स्थित थी, लेकिन इस प्रकरण में सडक़-विशिष्ट दर निर्धारित नहीं की गई, भूमि का बाजार मूल्य दो गुना किया जाना था। जबकि अपर तलसीलदार ने सामान्य दर पर प्रस्तावित किया। इससे भूखंड क बाजार मूलय का 179.68 करोड़ गलत निर्धारण हुआ। पट्टा विलेख में प्रीमियम की राशि गलत तरीके से कम करके बताई गई थी। प्रीमियम कम करने से स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क की कम वसूली हुई। इससे 44.92 करोड़ प्रीमयम, 11.48 कररोड़ स्टाम्प शुल्क, 8.65 करोड़ पंजीयन शुल्क सहित शासन को कुल 65 करोड़ रुपये की हानि हुई। शासन की ओर से जून 2023 में बताया गया कि भूमि आवंटन पर निर्णय मंत्रि-परिषद ने लिया था। लेकिन बार-बार मांगे जाने के बाद भी प्रमुख सचिव ने लेखापरीक्षा को इस मुद्दे पर कैबिनेट नोट नहीं भेजा 

प्रकरण-2 श्री सत्यसांई मेडिकल एण्ड हेल्थ केयर ट्रस्ट, इंदौर 

राजस्व विभाग ने श्री सत्य साईंमेडिकल एंड हेल्थ केयर ट्रस्ट को सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी के पास ग्राम बांगड़दा, इंदौर में शून्य प्रीमियम और एक रुपये वार्षिक पट्टा किराए पर बच्चों के हृदय रोग के इलाज के लिए चिकित्सालय निर्माण हेतु सर्वे नंबर 216, 217, 218, 224, 225 एवं 226 की कुल 2.231 हेक्टेयर भूमि दिसम्बर 2019 में आवंटित की। इस प्रकरण में कलेक्टर ने संभागीय आयुक्त के माध्यम से राजस्व विभाग को भेजे प्रस्ताव में आवंटित भूमि के बाजार मूल्य 5.58 करोड़ के बदले में इतनी राशि का प्रीमियम एवं 4.18 लाख का वार्षिक पट्टा किराए के निर्धारण किया था। आवंटित भूमि पर संस्थान ने दो साल 9 महीने में निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। लेखा परीक्षा ने माना कि शून्य प्रीमियम और एक रुपये वार्षिक पट्टा किराया पर भूमि आवंटन न तो लोकहित में और न ही राजस्व हित में था। इससे शासन को 4.19 करोड़ प्रीमियम और वार्षिक पट्टा किराए के रूप में 4.18 लाख रुपये की हानि हुई। इस मामले में भी शासन ने मंत्रिपरिषद के निर्णय का उल्लेख तो किया, लेकिन कैबिनेट नोट लेखापरीक्षा को नहीं भेजा  

प्रकरण-3 स्वामी विवेकानंद तकनीकी संस्थान, इंदौर

स्वामी विवेकानंद तकनीकी संस्थान, इंदौर ने तकनीकी संस्थान भवन के निर्माण हेतु एक भू-खंड के लिए अप्रैल 2022 में आवेदन किया। कलेक्टर ने लागू आर.बी.सी. प्रावधानों को आयुक्त के माध्यम से राजस्व विभाग को मई 2022 में भेजा।  कलेक्टर ने मूल्यांकन कर भू-खंड के आवंटन पर भूमि के बाजार मूल्य के 50 प्रतिशत के बराबर प्रीमियम एवं प्रीमियम के 2 प्रतिशत पर वार्षिक पट्टा किराया लिया जाना था। लेकिन कलेक्टर के प्रस्ताव पर उचित विचार किए बिना राजस्व विभाग ने सचिव, स्वामी विवेकानंद तकनीकी संस्थान, दतोदा, तहसील महू जिला इंदौर के पक्ष में छह सर्वे नंबरों की कुल 9.246 हेक्टेयर भूमि आवंटन को शून्य प्रीमियम एवं एक वर्षिक पट्टा किराए पर स्वीकृति दी। आवंटित भूमि का कब्जा सौंपा और संस्थान के पक्ष में 30 वर्षों के लिए पट्टा निष्पादित किया। इससे शासन को 12.94 लाख प्रीमियम और वार्षिक पट्टा किराया 25,889 प्रतिवर्ष वसूली न होने से राजस्व घाटा हुआ। 

कैग ने की संशोधन की अनुशंसा - 

भूमि-आवंटन में अनियमितता को लेकर नियंत्रक महालेखापरीक्षक की ओर से अनुशंसा की गई है कि शासन को अप्रयुक्त आवंटित भूमि की समीक्षा के प्रावधान को शामिल करने मप्र भू राजस्व संहिता की धारा 182 को संशोधित करने पर विचार करना चाहिए। 

क्या है चैरिटेबल संस्था को स्थायी पट्टे का नियम 

एमपी एन.बी.एन.एन. की कंडिका 31 के अनुसार चैरिटेबल संस्था को स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन के प्रकरण में भूमि के बाजार मूल्य के 25 प्रतिशत के बराबर प्रीमियम एवं निर्धारित दरों की दो गुने दर से वार्षिक पट्टा किराया अधिरोपित किया जाएगा। इन निर्देशों की कंडिका 65 में प्रावधान है कि स्थायी पट्टे की अवधि को 99 वर्ष तक बढ़ाने के लिए वित्त विभाग की सहमति आवश्यक होगी। महानिरीक्षक पंजीयन की मार्गदर्शिका के अनुसार राजमार्ग या उसके बाईपास पर स्थित भूमि का मूल्य, उन क्षेत्रों एवं गांवों जिनके लिए मार्गदर्शिका दरें (सडक़ विशिष्ट) अलग से निर्दिष्ट की गई हैं को छोडक़र दो गुना किया जाएगा। 

मप्र में 87.10 लाख हेक्टेयर राजस्व भूमि 

मप्र भू-अभिलेख के मार्च 2022 के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में शासकीय (राजस्व) भूमि का कुल क्षेत्रफल 87 लाख, 10 हजार 580 हेक्टेयर है।