राजधानी

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मप्र विधानसभा में लोकतंत्र की मजबूती पर युवा मंथन, मंत्री विजयवर्गीय बोले-कॉलर खड़ी करने वाले पहली ही बार में हो गए भूतपूर्व

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- मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष हुए शामिल 

भोपाल। राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र) जोन-6 में शामिल मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ, सोमवार, 30 मार्च को विधानसभा के विधान परिषद भवन में हुआ। कार्यक्रम के मंच पर उपस्थित रहकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने युवा विधायकों को संबोधित किया।

 संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में युवा विधायकों को लम्बी पारी के कई सूत्र सुझाए। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसे कई विधायकों को देखा है, जिन्होंने एक चुनाव लड़ा और उसके बाद भूतपूर्व हो गए, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एक बार चुनाव जीतने के बाद उनकी कॉलर खड़ी हो गई। युवा विधायकों को उन्होंने अध्ययनशील बनने तथा जिम्मेदार एवं गुस्सा रहित कार्यालय संचालन का भी सुझाव दिया। सम्मेलन को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने भी संबोधित किया। तीनों राज्यों से आए युवा विधायकों ने ‘लोकतंत्र और नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करने हेतु युवा विधायकों की भूमिका’ विषय पर अपने विचार रखे। 

युवा विधायकों की दोहरी जिम्मेदारी: मुख्यमंत्री 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवा विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि हम चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं और हमारी लंबी विरासत है। उस विरासत को सहेजते हुए हमारी दोहरी जवाबदारी है। जनता के बीच बने रहने के लिए विधानसभा और जिले में भी हमारी भूमिका है। विनम्रता के साथ जनता के दिलों पर राज करते रहें। अच्छाईयों और कमजोरी दोनों को समझें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबसे ज्यादा जरूरी है कि हमारे अपने कार्य क्षेत्र विधानसभा में हमारी भूमिका बनी रहे। राजनीतिक क्षेत्र में काम करते समय क्षेत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी ध्यान रखें। अपनी व्यवस्थित कार्य योजना  होनी चाहिए। अध्ययन के लिए भी समय रखना चाहिए। युवा विधायकों को अध्ययन के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। परेशानी में रास्ता निकालना आना चाहिए। 

राजनीतिक नेतृत्व तय करता है देश-प्रदेश की दिशा : तोमर 

मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीति ही नेतृत्व का क्षेत्र है। राजनीति देश-प्रदेश के विकास की दिशा तय करती है। योजना बनाती है और कार्यपालिका के नेतृत्व में क्रियान्वयन कराती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में राजनीति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। देश की जनता अपेक्षाओं के साथ चुनकर हमें भेजती है। पहले जनता की अपेक्षाएं बड़ी-बड़ी होती थीं, अब छोटी भी होती हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र आसानी से प्राप्त नहीं हुआ, पूर्वजों ने प्राणों का उत्सर्ग किया, जवानी बर्वाद की। फांसी के फंदे को चूमा, तब खून से सनी आजादी प्राप्त हुई। आजादी का मूल्य हमें ध्यान रखना चाहिए। समस्याओं पर काम करना है। इस सम्मेलन में हमें यह तय करना है कि लोकतंत्र को मजबूत करने से युवा विधायकों की भमिका क्या हो सकती है। 

अफसरशाही को विधायिका के प्रति जवाबदेह बनाना जरूरी: देवनानी

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष  वासुदेव देवनानी ने कहा कि सभी युवा विधायक क्षेत्र के विकास के लिए नागरिक विकास समिति बनाएं। क्षेत्र में अफसरशाही को विधायिका के प्रति जवाब देह बनाना जरूरी है। हमें भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। सार्वजनिक संसाधन का न्यायोचित वितरण तय करना है। उन्होंने कहा कि  युवा विधायकों को समय के साथ खुद को ढालना होगा। पद की गरिमा के अनुसार विधायक ऐसी नीति निर्धारण करेंगे, जिसमें जनता का हित हो। युवा विधायकों को अध्ययन का स्वभाव बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा में सार्वजनिक विकास पर मंथन हो। विधानसभा शोर शराबे का केन्द्र न बने,। अंतिम छोर के व्यक्ति का विकास नहीं, तब तक भारत विकसित राष्ट्र नहीं बनेगा। 

पार्टी नहीं क्षेत्र के हिसाब से हो विकास: सिंघार 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि युवा विधायक नई सोच, सपनों की उड़ान लेकर विधानसभा पहुंचते हैं। यहां नियम-कानून बनते हैं। लेकिन जनता कानून नहीं, काम देखती है। कुछ विधानसभाओं में हजारों करोड़ के काम हो जाते हैं। कुछ विधानसभा वंचित रह जाती हैं। विकास के नाम पर विरोध नहीं होना चाहिए। क्षेत्र का विकास पार्टी के नहीं क्षेत्र के हिसाब से होना चाहिए।