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जांच के बहाने वसूली पर पुलिस मुख्यालय सख्त, 14 दिन में जांच पूरी नहीं तो अधिकारियों पर होगी विभागीय कार्रवाई

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भोपाल। जांच के नाम पर मामलों को लंबित रखकर कथित अवैध वसूली की बढ़ती शिकायतों पर पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि प्रारंभिक जांच अधिकतम 14 दिनों में पूरी करना अनिवार्य होगा। तय समयसीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस की बाध्यता है। इसे टालने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

दरअसल, हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां शिकायतों को बिना एफआईआर दर्ज किए महीनों तक जांच के नाम पर लंबित रखा गया। इस दौरान शिकायतकर्ताओं से रिश्वत मांगे जाने की शिकायतें भी सामने आईं, जिसे मुख्यालय ने गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना है।

विशेष मामलों में ही प्रारंभिक जांच की अनुमति 

पुलिस मुख्यालय से जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि केवल सीमित परिस्थितियों -जैसे पारिवारिक विवाद या कुछ आर्थिक मामलों में ही प्रारंभिक जांच की अनुमति होगी, वह भी तय समयसीमा के भीतर। तीन से सात वर्ष तक की सजा वाले मामलों में भी प्रारंभिक जांच के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।

न्यायालय की आपत्ति के बाद हुआ निर्णय 

पुलिस मुख्यालय ने यह निर्देश हाल ही में एक प्रकरण में न्यायालय की कड़ी आपत्ति के बाद जारी किए हैं, जिसमें जिला पुलिस ने अपराध दर्ज करने के बजाय मामले को जांच में लंबित रखा था। इसके बाद सीआईडी के विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव ने सभी पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश जारी किए। परिपत्र में सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय का उल्लेख करते हुए दोहराया गया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलते ही एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज न करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

संज्ञेय अपराध में तत्काल एफआईआर 

पुलिस मुख्यालय ने यह भी साफ किया है कि जहां प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है, वहां तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। जांच के नाम पर देरी, वसूली या अन्य अनियमितताओं को अब सीधे जवाबदेही से जोड़ा जाएगा। इन निर्देशों के साथ पुलिस मुख्यालय ने संकेत दे दिया है कि अब जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्ती से अमल कराया जाएगा, ताकि आम जनता का विश्वास पुलिस व्यवस्था में बना रहे।