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मध्यप्रदेश
2025 से कम रहा 10वीं का परिणाम, 12वीं का 2.82 प्रतिशत अधिक
मध्यप्रदेश
भोपाल। मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के बुधवार को घोषित हुए परिणामों में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या पिछले साल की अपेक्षा 10वीं में कम और 12वीं में अधिक रही। जनजातीय क्षेत्र सहित कुछ जिलों का परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक रहा है तो ग्वालियर-चंबल के भिण्ड, मुरैना, दतिया जैसे जिले परिणामों के मामले में फिसड्डी साबित हुए हैं।
माध्यमिक शिक्षा मंडल के 10वीं कक्षा के नियमित विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम वर्ष 2025 से 2.80 प्रतिशत कम रहा है। इनमें 3.90 प्रतिशत छात्र एवं 1.75 प्रतिशत छात्राएं अधिक अनुत्तीर्ण रही हैं। स्वाध्यायी विद्यार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत भी पिछले साल से 1.89 प्रतिशत कम रहा। इनमें छात्रों का प्रतिशत 1.89 और छात्राओं का 2.96 है।
प्रथम श्रेणी पास विद्यार्थी बढ़े, द्वितीय और तृतीय श्रेणी घटे
10वीं कक्षा के परिणामों में वर्ष 2025 की अपेक्षा प्रथम श्रेणी पास नियमित और स्वाध्यायी विद्यार्थियों की संख्या इस बार 2191 बढ़ी है। जबकि द्वितीय श्रेणी पास विद्यार्थियों की संख्या 40318 और तृतीय श्रेणी विद्यार्थियों की संख्या 5783 कम हुई है।
2.82 प्रतिशत अधिक रहा 12वीं का परिणाम
पिछले साल की तुलना में माध्यमिक शिक्षा मंडल के 1२वीं कक्षा के नियमित और स्वाध्यायी विद्यार्थियों के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 2.82 प्रतिशत अधिक रहा है। इनमें नियमित विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम वर्ष 2025 से 1.53 प्रतिशत अधिक रहा है। इनमें 1.02 प्रतिशत छात्र और 1.86 प्रतिशत छात्राएं अधिक उत्तीर्ण हुई हैं। इसी प्रकार स्वाध्यायी विद्यार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत भी पिछले साल से 4.12 प्रतिशत अधिक रहा। इनमें छात्रों का प्रतिशत 5.15 और छात्राओं का 2.70 रहा है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल 11096 अधिक नियमित विद्यार्थी पास हुए। जबकि 20347 स्वाध्यायी विद्यार्थी पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम पास हुए हैं।
उत्तीर्ण का प्रतिशत गिरा, प्रावीण्य का बढ़ा
10वीं में प्रदेश के शासकीय और निजी दोनों ही श्रेणी के विद्यालयों में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत गिरा है। जबकि प्रावीण्य सूची में शामिल छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ी है। शासकीय विद्यालयों का उत्तीण प्रतिशत 0.79 और अशासकीय का 5.59 कम हुआ है। पिछले साल की अपेक्षा नियमित 17230 और स्वाध्यायी 25594 विद्यार्थी अधिक फेल हुए हैं। जबकि प्रावीण्य सूची में पिछली बार के 68 से 75 अधिक कुल 143 छात्र एवं पिछली बार के 144 से 91 अधिक कुल 235 छात्राएं प्रावीण्य सूची में आई हैं।
प्रथम श्रेणी पास विद्यार्थी बढ़े, द्वितीय-तृतीय श्रेणी घटे
12वीं कक्षा में वर्ष 2025 की अपेक्षा प्रथम श्रेणी पास नियमित विद्यार्थियों की संख्या इस बार 48336 अधिक रही है। जबकि द्वितीय श्रेणी पास विद्यार्थियों की संख्या 30399 और तृतीय श्रेणी विद्यार्थियों की संख्या 338 कम हुई है। इसी प्रकार प्रथम श्रेणी पास स्वाध्यायी परीक्षार्थियों की संख्या 698 बढ़ी है। जबकि द्वितीय श्रेणी के 649 और तृतीय श्रेणी में 1769 विद्यार्थी पिछले वर्ष की अपेक्षा कम पास हुए हैं।
शासकीय का बढ़ा, अशासकीय का घटा परिणाम
12वीं कक्षा में प्रदेश के शासकीय विद्यालयों के उत्तीर्ण विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम पिछले वर्ष की अपेक्षा 4.64 प्रतिशत अधिक रहा है। जबकि अशासकीय विद्यालयों का परीक्षा परिणाम पिछले साल की अपेक्षा 2.80 प्रतिशत कम रहा है।
प्रावीण्य सूची में छात्र घटे छात्राएं बढ़ीं
12वीं के परीक्षा परिणामों की प्रावीण्य सूची में पिछले साल की अपेक्षा इस बार छात्राओं की संख्या बढ़ी है। जबकि छात्रों की संख्या कम हुई है। वर्ष 2025 में कुल 70 छात्रों की अपेक्षा 7 कम कुल 63 छात्र ही प्रावीण्य सूची में शामिल हुए हैं। जबकि पिछले साल 89 की अपेक्षा 69 अधिक, इस वर्ष कुल 158 छात्राओं ने प्रावीण्य सूची में स्थान पाया है।
चार सालों घटी-बढ़ी अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या
मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं की परीक्षा में वर्ष 2023 एवं 2024 में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या क्रमश: 3,12,329 और 3,58,640 थी। 2025 में यह घटकर 2,84,865 रह गई। जबकि 2026 में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या एक बार फिर से 4828 बढक़र 2,89,693 हो गई।
झाबुआ के शासकीय, अलीरातपुर के प्रायवेट विद्यालय आगे
12वीं की परीक्षाा में प्रदेश के 52 जिलों में शासकीय विद्यालयों का सबसे अच्छा परिणाम झाबुआ जिले में 94.18 प्रतिशत जबकि प्रायवेट अशासकीय विद्यालयों का सर्वश्रेष्ठ परिणाम 96.69 अलीराजपुर का रहा है। शासकीय विद्यालयों का 90 प्रतिशत से अधिक परिणाम झाबुआ में 93.94, अनूपपुर में 93.78, अलीराजपुर में 91.35, मंडला में 90.96 और नीमच में परिक्षा परिणाम 90.46 प्रतिशत रहा है। इसी प्रकार अशासकीय विद्यालयों में 90 प्रतिशत से अधिक परीक्षा परिणाम वाले जिला सिर्फ अलीराजपुर 96.69 और सीधी 91 प्रतिशत शामिल हैं। उत्तीर्ण हुए नियमित विद्यार्थियों की श्रेणी में भी झाबुआ 93.23 प्रतिशत के साथ पहले और 93.04 प्रतिशत के साथ अनूपपुर दूसरे स्थान पर है। नरसिंहपुर 92.62 तीसरे, अलीराजपुर 91.59 चौथे और सीधी 90 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है।उत्तीर्ण हुए स्वाध्यायी विद्यार्थियों के मामले में 59.93 प्रतिशत के साथ नरसिंहपुर सबसे आगे और 17.27 प्रतिशत के साथ दमोह जिला सबसे पीछे है।
दमोह-दतिया का परीक्षा परिणाम सबसे अधिक खराब
शासकीय विद्यालयों के परीक्षा परिणामों में सबसे पीछे 62.46 प्रतिशत के साथ दमोह जिला रहा है। अशासकीय विद्यालयों का परीक्षा परिणाम भी 50.90 प्रतिशत के साथ पूरे प्रदेश में अंतिम चौथे स्थान पर रहा है। शासकीय विद्यालयों में 70 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम वाले जिलों में 65.09 प्रतिशत भिण्ड, 65.40 प्रतिशत निवाड़ी, 66.86 प्रतिशत दतिया, 68.38 प्रतिशत रीवा एवं मुरैना तथा 68.95 प्रतिशत के साथ टीकमगढ़ जिला शामिल है। प्रायवेट स्कूलों में सबसे खराब 43.44 प्रतिशत परीक्षा परिणाम दतिया का रहा है। इसके अलावा भिण्ड का 48.98, मुरैना का 48.94 रहा है। दमोह 50.90 प्रतिशत, ग्वालियर 58.13, टीकमगढ़ 58.96, रीवा का 63.53, मैहर का 63.63 प्रतिशत एवं छतरपुर के प्रायवेट विद्यालयों का परीक्षा परिणाम निचली श्रेणी में 64.51 प्रतिशत रहा है।
10वीं का चार सालों का परिणाम
वर्ष नियमित स्वाध्यायी
2023 63.29 17.11
2024 58.1 13.26
2025 76.22 28.7
2026 73.42 26.38
12वीं का चार सालों का परिणाम
वर्ष नियमित स्वाध्यायी
2023 55.28 18.15
2024 64.49 22.46
2025 74.48 26.48
2026 76.01 30.6
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