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दर्शन से जुड़ेगा तभी नैतिक बनेगा ए.आई, एकात्म पर्व के तीसरे दिन अद्वैत एवं एआई पर हुआ संवाद
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भोपाल। भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो अपनी अद्वैत आधारित गहन दार्शनिक परंपरा के कारण एआई को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है। वैश्विक स्तर पर एआई को लेकर प्राय: भय का वातावरण है, तकनीक से जुड़े लोग नौकरियों के संभावित नुकसान और इस क्षेत्र में आने वाले बड़े बदलावों को लेकर चिंतित हैं, वहीं भारत अपेक्षाकृत आशावादी दृष्टिकोण अपनाता है। कृत्रिम बुद्धिमता अर्थात आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (एआई) जब दर्शन से जुड़ेगा, तभी वह नैनिक बन सकेगा। यह बात देश के चर्चित ए.आई प्लेटफार्म के संस्थापक डॉ प्रत्युष कुमार ने रविवार को पंच दिवसीय एकात्म पर्व के तीसरे दिन अद्वैत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशल इंटेलिजेंश) विषय पर संबोधित करते हुए कही।
डॉ. प्रत्युष ने कहा कि यदि एआई का उपयोग लोगों को व्यसनी बना सकता है, तो उसी तकनीक का प्रयोग उन्हें प्रेरित और सशक्त बनाने के लिए भी किया जा सकता है। एआई के भविष्य पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई उस स्तर तक पहुँच सकता है, जहाँ वह व्यवहारिक रूप से मनुष्यों के समान संवाद करने, भावनाओं को व्यक्त करने और समझने में सक्षम होगा।
कार्यक्रम में आई.आई.टी नई दिल्ली के प्रोफेसर राहुल गर्ग, रामकृष्ण मिशन चेन्नई के स्वामी परम शिवानंद एवं कल्याण मुत्तुराजन उपस्थित रहे। वहीं अद्वैत एवं शांति विषय पर आयोजित सत्र में स्वामी परमात्मानंद सरस्वती, यूनेस्को चेयर बीएचयू के प्रोफेसर प्रियंकर उपाध्याय एवं नीना मजूमदार का संवाद हुआ। ‘एक भारत: आचार्य शंकर के पदचिंन्हो पर’ विषय पर आयोजित सत्र में भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन.वेंकटरामन, स्वामी परिपूर्णानंद सरस्वती एवं सुश्री अनुराधा गोयल ने संवाद किया। संवाद के साथ सत्त्व,रज, तम पर कार्यशाला में नई दिल्ली के विशाल चौरासिया एवं स्वामी वेदतत्त्वानंद पुरी ने सम्बोधित किया।
दर्शन और एआई के समन्वय से सुगम होगा मानव जीवन
डॉ. प्रत्युष ने कहा कि वर्तमान समय में हम पुन: डेटा-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर अग्रसर हो रहे हैं और एआई के माध्यम से उसे अधिक अर्थपूर्ण और उपयोगी बना रहे हैं। उनके अनुसार, तकनीक का स्तर निरंतर बढ़ेगा, किंतु वर्तमान समय में हमारे पास यह अवसर है कि हम एआई को किसी भी दार्शनिक दृष्टिकोण के साथ संरेखित कर सकते हैं, जिससे उसकी नीतियां और उपयोग हमारे सिद्धांतों के अनुरूप निर्धारित किए जा सकते हैं। आशा है कि अद्वैत वेदान्त के दर्शन और एआई के समन्वय से मानव जीवन अधिक सुगम और क्रांतिकारी दिशा में अग्रसर हो सकता है।
एआई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति करेगा भारत
डॉ. प्रत्युष ने कहा कि पिछले चार-पाँच दशकों में भारत का तकनीकी योगदान अपेक्षाकृत सीमित रहा है, चाहे वह इंटरनेट हो, सोशल मीडिया हो या एआई का क्षेत्र। इसके बावजूद हम आशा कर सकते हैं कि भारत भविष्य में एआई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति करेगा और अद्वैत के साथ उसके समन्वय द्वारा विश्व को एक उच्चतर दिशा प्रदान करेगा। चेन्नई के विद्वान संन्यासी स्वामी परम शिवानंद ने बताया कि वे वेदांत दर्शन को आधुनिक तकनीक से जोडक़र युवा पीढ़ी के मानसिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के लिए अथक प्रयासरत हैं।वेदांत को गहन व्यावहारिक होना चाहिए। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर राहुल गर्ग ने बताया कि हम अपने बेहतरीन दिमागों को अद्वैत की शिक्षा और इसकी अवधारणाओं से जोड़ें तो हमारे पास एक ऐसा व्यक्ति होगा जिसके पास एआई का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान होगा, जो दुनिया को मूल्यों और एकत्व की भावना पर आधारित बेहतरीन स्टार्टअप्स दे सकेगा।
50 आचार्य प्रतिदिन कर रहे वैदिक अनुष्ठान
पंचदिवसीय एकात्म पर्व में प्रतिदिन श्रृंगेरी से आमंत्रित 50 विद्वान आचार्य वैदिक अनुष्ठान कर रहे है। जिसमें विभिन्न वैदिक अनुष्ठानों का शास्त्रोक्त विधि से आयोजन किया जा रहा है। मंत्र पारायण, वेद पारायण तथा यज्ञ अनुष्ठानों के माध्यम से वेदों में वर्णित विविध यज्ञ परंपराओं का सजीव निरूपण किया जा रहा है।
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