राजधानी
खटारा बसों से हर दिन हो रही दुर्घनाएं, दोषी कौन?
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भोपाल में बाणगंगा स्कूल बस दुर्घटना में निलंबित आरटीओ को न्यायालय से मिली राहत
भोपाल। करीब एक सप्ताह पहले राजधानी भोपाल के वाणगंगा चौराहे पर अनफिट स्कूल बस के कारण हुई दुर्घटना के बाद निलंबित किए गए भोपाल आरटीओ जितेन्द्र शर्मा को बुधवार को उच्च न्यायालय से राहत मिल गई। न्यायालय ने शर्मा को अंतरिम राहत देते हुए उनके निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए न्यायालय ने उन्हें पूर्व पद पर बहाली के आदेश दिए हैं।
निलंबन के विरोध में लगाई थी याचिका
निलंबन आदेश के विरुद्ध आरटीओ जितेन्द्र शर्मा ने उच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी। दस्तावेजों की जांच में साफ हुआ कि बस को परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट शर्मा ने नहीं दिया। न्यायालय की जांच में पता चला कि इस बस को परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट पूर्व क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी संजय तिवारी द्वारा जारी किए गए थे। न्यायालय ने माना कि दस्तावेज जारी करने में जितेन्द्र शर्मा की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही। इसलिए इस मामले में जीतेंद्र शर्मा को प्रथम दृष्टया दोषी नहीं माना जा सकता।
इन दुर्घटनाओं के लिए किसे मिलेगी सजा?
विगत 10 दिन में खटारा स्कूल बसों के कारण राजधानी में दो बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं। वाणगंगा चौराहे पर अनफिट बस की टक्कर से एक महिला चिकित्सक की मौत हो गई और आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं तीन दिन पहले सेम यूनिवर्सिटी की बस में पड़ी मिनी ट्रक की मामली टक्कर से इस बस के पिछले पहिए निकल गए। इस दुर्घटना में भी आधे दर्जन से अधिक छात्र घायल हुए। विगत 10 जनवरी को भी एक निजी कॉलेज की बस में ट्रक की टक्कर एक एक छात्रा की मौत और दो दर्जन छात्र-छात्राएं घायल हुए थे। शहर में अनफिट यात्री और स्कूल बसों के खिलाफ अभियान चलाने के दावे तो हो रहे हैं, लेकिन शहर में दौड़ रहीं अनफिट स्कूल बसें, इस अभियान पर सवालिया निशान लगा रही हैं। न्यायालय के आदेश के बाद अब सवाल उठता है कि अनफिट दौड़ती बसों पर आखिर रोक कौन लगाएगा? इन दोनों ही बसों की फिटनेस की जांच पहले हुई होती तो ये दुर्घटनाएं रोकी जा सकती थीं। सवाल उठता है कि लापरवाह अधिकारी दोषी नहीं तो इन दुर्घटनाओं के लिए बस मालिकों के अलावा क्या दोषी अधिकारियों को भी सजा मिलेगी?
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