मध्यप्रदेश

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सोम डिस्टिलरीज को सर्वोच्च न्यायालय से राहत, शराब लायसेंस को रिन्यू करने मप्र उच्च न्यायालय के आदेश को रखा यथावत

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नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के लायसेंस निलंबन आदेश के विरुद्ध शराब लायसेंस को रिन्यू किए जाने को लेकर मप्र उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय ने भी यथावत रखा है।  हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उच्च न्यायालय की कुछ बातों को खारिज कर दिया है। इनमें एडवोकेट जनरल कार्यालय के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां, कंपनी को राज्य से हर्जाना मांगने की अनुमति देने वाला आदेश, और राज्य पर एक लाख रुपये का अर्थदण्ड लगाने का फैसला शामिल है।

सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि ‘हम इस बात से संतुष्ट हैं कि इस मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, उच्च न्यायालय  द्वारा प्रतिवादी नंबर 1 (सोम डिस्टलरीज प्रा.लि.) के लाइसेंस को रिन्यू करने के लिए दिए गए निर्देश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इस हद तक उच्च न्यायालय का फैसला यथावत रखा जाता है।

उल्लेखनीय है कि फर्जी परमिट का इस्तेमाल करके शराब की अवैध ढुलाई से जुड़े अपराधिक मामले की जांच के आधार पर तत्कालीन आबकारी आयुक्त ने कंपनी और उससे जुड़ी इकाइयों के आठ लाइसेंस करीब 8 महीने पहले निलंबित कर दिए थे। विगत 24 सितंबर को, उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कंपनी के शराब निर्माण व पैकेजिंग संबंधी सभी  लाइसेंस को रिन्यू करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने मप्र सरकार को कंपनी को एक लाख रुपये का अर्थदण्ड (खर्च) देने का भी आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने कंपनी को यह अधिकार भी दिया है कि वह कामकाज बंद रहने की अवधि के दौरान हुए नुकसान या हर्जाने के लिए किसी उचित मंच (फोरम) पर दावा कर सकती है।