राजधानी
मुख्यमंत्री बोले- प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार, ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर केंद्रित दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार का किया शुभारंभ
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भोपाल। प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए कही।
मुख्यमंत्री ने डॉ. यादव ने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाये। विद्वान, वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर एवं पर्यावरण पर आधारित एक अन्य पत्रिका का विमोचन भी किया। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर लघु फिल्म की प्रस्तुति भी हुई। इस दौरान आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया।
अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग जरूरी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग हो, इन बिन्दुओं के साथ ही हम ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं।
स्थायी भविष्य केवल विचार नहीं, यह जिम्मेदारी: राकेश सिंह
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा किलोक निर्माण विभाग ने अपने प्रशिक्षण कैलेंडर में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को शामिल किया है। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। उन्होंने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम लागत वाली ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों का विकास किया जाए, जिससे आम नागरिक भी इनका लाभ प्राप्त कर सकें।
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