मध्यप्रदेश

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आधारभूत विषय बालक के सर्वांगीण विकास का आधार, विद्याभारती मध्य भारत प्रांत के आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में प्रांत संगठन मंत्री ने किया संवाद

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भोपाल। विद्याभारती मध्य भारत प्रांत द्वारा आयोजित प्रांतीय आचार्य सामान्य प्रशिक्षण वर्ग के सप्तम दिवस के संवाद सत्र में विद्याभारती मध्य भारत प्रांत के प्रात संगठन मंत्री निखिलेश महेश्वरी ने प्रशिक्षार्थियों से संवाद किया। 

उन्होंने कहा कि विद्याभारती अपने लक्ष्य के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करती है। उन्होंने विद्यार्थियों के शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास के सूत्र सुझाते हुए उन्होंने कहा कि ये हमारे पाँच आधारभूत विषय-शारीरिक शिक्षा, योग शिक्षा, संगीत शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा  के माध्यम से संभव हैं। शारीरिक शिक्षा से बालक का शरीर स्वस्थ रहता है, इसके लिए विद्यालय विभिन्न गतिविधियां चलाई जाती है। शारीरिक शिक्षा से अन्नमय कोष का विकास होता है।

व्यतित्व विकास की साधना का आधार योग

श्री महेश्वरी ने कहा कि व्यक्तित्व विकास की उच्चस्तरीय साधना का आधार योग है। योग की शक्ति से एकाग्रता आती है,योग शिक्षा से प्राणमय कोष का विकास होता है। संगीत शिक्षा से व्यक्तित्व विकास सम्भव है। संगीत मन का विषय है, इससे मनोमय कोष का विकास होता हैं। भारतीय साहित्य संस्कृत भाषा में है। संस्कृत से  बालक के विज्ञानमय कोष का विकास होता है। नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा की सप्तपदी यात्रा  के माध्यम से जीवन यात्रा सफल होती है, सेवा इसका माध्यम है। समाज सेवा ही प्रभु की भक्ति है उन्होंने कहा कि पाँचों आधारभूत विषयों के माध्यम से हमें ऐसे सक्षम बालक का निर्माण करना है जो विश्व में भारत को जग सिर मोर बनाएंगे । संवाद सत्र में ग्राम भारती के उपाध्यक्ष मुरलीधर धर्मवानी, सेवा क्षेत्र की शिक्षा के क्षेत्रीय संयोजक (मध्य क्षेत्र) पुरुषोत्तम जोशी, वर्ग संयोजक अंकित शुक्ला उपस्थित रहे।