मध्यप्रदेश

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जल्द एकीकृत होंगी परिवहन विभाग की वाहन चौकियां और टोल नाके , मुख्यमंत्री ने ली परिवहन सहित छह विभागों की समीक्षा बैठक

मध्यप्रदेश

भोपाल। प्रदेश की सीमा में अन्य राज्यों से आने वाले मालवाहक वाहनों की जांच के लिए परिवहन चौकियों और टोल नाकों को और अधिक आधुनिक एवं सुविधा सम्पन्न बनाया जाए। इसके लिए परिवहन चौकियों को शीघ्र ही एकीकृत (इंटीग्रेटेड) करने के प्रयास किए जाएं। इस तरह के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में परिवहन मंत्री उदयप्रताप सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सर्वाधिक दुर्घटना क्षेत्रों की मैपिंग करा ली जाए, जिससे जरूरतमंदों को जल्द से जल्द मेडिकल सर्विसेस मुहैया कराई जा सकें। विभिन्न विभागों द्वारा दी जा रही एम्बुलेंस सेवाओं को एक प्लेटफार्म पर लाया जाए, जिससे दुर्घटना क्षेत्रों में जरूरतमंद तक 30 मिनट से भी कम समय में एम्बुलेंस ऑटो मोड (जो स्पॉट से निकटतम हो) में पहुंच जाए।

मप्र में गठित होगा राज्य सडक़ सुरक्षा सचिवालय 

बैठक में बताया गया कि हाल में हुई सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की बैठक में कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने इन दोनों योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की पहल की बेहद सराहना की गई है। इसी कमेटी की अनुशंसा पर सडक़ सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पृथक से ‘म.प्र. राज्य सडक़ सुरक्षा सचिवालय’ का गठन भी किया जा रहा है। 

इस वर्ष 5721 करोड़ राजस्व लक्ष्य

परिवहन सचिव ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में विभाग को दिए गए 4,400 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध कुल 4911.78 करोड़ रुपये राजस्व आय अर्जित की गई। दिए गए लक्ष्य से विभाग द्वारा 111.6 प्रतिशत अधिक राजस्व अर्जन किया गया है। वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 5,721 करोड़ रुपए राजस्व आय का लक्ष्य रखा गया है। परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश में 51 प्रकार की फेसलेस सर्विसेस दी जा रही हैं। इससे नागरिकों को बिचौलियों से तो मुक्ति मिली ही है, साथ ही पारदर्शितापूर्ण सेवा प्रदाय भी सुनिश्चित हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी उपलब्धियों के लिए विभागीय मंत्री, अधिकारियों एवं मैदानी अमले को भी बधाई दी।

केन्द्रीय योजनाओं में शीर्ष पर प्रदेश 

परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि पीएम राहत एवं राहवीर योजना के क्रियान्वयन में मप्र पहले स्थान पर है। सभी 55 जिलों में जिला नोडल अधिकारियों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है। योजना में कुल 2,298 प्रकरणों में से 1692 प्रकरण अनुमोदित कर दिए गए हैं। 

90 प्रतिशत तक परिणाम देने वाले स्कूल होंगे सम्मानित 

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और अन्य कार्य गतिविधियों की समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 26 शालाएं ऐसी हैं, जहां शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन शालाओं के अलावा 90 या 95 प्रतिशत से अधिक परिणाम देने वाली शालाओं को भी सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय की अवधारणा/योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना भी तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय गतिविधियों में तेजी लाएं और 16 जून से प्रारंभ हो रहे शैक्षणिक सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं।  स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराए जाएं, ताकि ऐसे विद्यार्थी जो अपने विद्यालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, वे उस विद्यालय के विकास-विस्तार में कुछ योगदान भी कर सकेंगे। प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी स्थानीय विधायक के साथ बैठकर पूरी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में व्यवस्थाओं की बेहतरी के लिए प्रयास करें। बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप एवं विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। 

मुख्यमंत्री ने यह भी दिए निर्देश 

- सम्राट वीर विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं।

- गुरू सांदीपनि के जीवन पर भी एक रोचक पुस्तक तैयार की जाए।

-एक वर्ष से पुरानी कोई भी घोषणा लंबित न रहे। वर्तमान में संचालित 14 विभागीय योजनाओं को निरंतर रखा जाए। 

- अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए। 

- नए सत्र की तैयारी पूरी की जाए और महिला एवं बाल विकास के सहयोग से छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए प्रारंभ से ही माहौल बनाया जाए। 

- स्कूल शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए एक साथ मिलकर करेंगे काम। 

- प्रदेश की सभी आंशिक जीर्ण-शीर्ण शालाओं की तत्काल मरम्मत करा ली जाए। 

-जिन हाईस्कूलों के आस-पास हायर सेकेण्डरी स्कूल उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे हाईस्कूलों को चिन्हित कर उन्हें हायर सेकेण्डरी स्कूलों में प्रोन्नत किए जाने का प्रस्ताव दें। 

- प्रदेश की शालाओं में 1 जुलाई से गुरू पूर्णिमा तक अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों की शिक्षक वंदना कार्यक्रम आयोजित किया जाए। 

- निजी विद्यालय खोलने के लिए सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को प्रोत्साहन दें। 

- शालाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए। कक्षा 8 से 12 में कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के कौशल को कार्य योजना के रूप में जोडऩे की योजना तैयार करें। 

कमजोर जिला सहकारी बैंकों को मजबूत करेगी सरकार 

मप्र के जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सुदृढ़ीकरण कर दिशा में अच्छा काम हुआ है। अगले 3 साल में सभी कमजोर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का सुदृढ़ीकरण किया जाए। इस तरह के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में सहकारिता विभाग की गतिविधियों की समीक्षा बैठक में दिए। इस अवसर पर सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव अनुराग जैन और प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा उपस्थित रहे।

बैठक में बताया गया कि विगत ढाई वर्षों में 18 कमजोर जिला बैंकों में से 6 की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। शासकीय अंश पूंजी सहायता से 6 जिला बैंक रीवा, सतना, जबलपुर, शिवपुरी, ग्वालियर एवं दतिया को सुदृढ़ करने का प्रयास है। अगले चरण में अन्य 6 भिंड, मुरैना, रायसेन, सागर, सीधी और नर्मदापुरम बैंक के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पैक्स से लेन-देन की प्रक्रिया को मोबाइल ऐप के जरिए किए जाने के प्रयास किए जाएं। इस पर बताया गया कि प्रदेश की सभी 4536 पैक्स को केंद्र प्रायोजित कंप्यूटराइजेशन योजना अंतर्गत कंप्यूटरीकृत कराया गया है। शत-प्रतिशत कंप्यूटराइजेशन से योजना क्रियान्वयन में प्रदेश देश में अग्रणी है। जल्द ही मोबाइल ऐप के जरिए ट्रांजेक्शन भी किया जा सकेगा।

बैठक की प्रमुख बातें

- बीज उत्पादक सहकारी संस्थाओं के माध्यम से गत 2 वर्षों में 14 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन एवं विपणन हुआ

- 1102 नई दुग्ध समितियों का गठन कर 5562 दुग्ध समितियों तथा वित्तीय समावेशन के लिए 76 हजार सदस्यों के खाते जिला सहकारी बैंक में खोले गए हैं। 

- मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राथमिक पैक्स में नवीन सदस्य बनने के लिए सदस्यता अभियान 30 जून तक चलाएं। विगत 14 अप्रैल से शुरू सदस्यता अभियान के जरिए पैक्स में 10 लाख नवीन सदस्य जोड़ें हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष में सवा लाख नए केसीसी स्वीकृति का लक्ष्य रखें। 

- बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय स्तर की नवीन गठित तीन सहकारी समितियों के साथ भागीदारी एवं व्यवसाय किया गया है।