राजधानी

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12 साल से प्लॉट के लिए भटक रहा पूर्व सैनिक, जनसुनवाई में छलका दर्द, जमीन विवाद, अतिक्रमण और बंटवारे की शिकायतों ने खोली राजस्व व्यवस्था की पोल

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भोपाल। कलेक्ट्रेट की मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जमीन विवाद, अतिक्रमण और राजस्व मामलों से जुड़ी शिकायतों की भरमार रही। सबसे मार्मिक मामला पूर्व सैनिक सचिन सिंह यादव का रहा, जिन्होंने अपने ही प्लॉट का कब्जा पाने के लिए पिछले 12 वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी बयां की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में खरीदे गए प्लॉट को कॉलोनाइजरों ने अन्य लोगों को भी बेच दिया। वर्ष 2019 में रजिस्ट्री होने के बावजूद उन्हें आज तक कब्जा नहीं मिला है। कई बार प्रशासन, पुलिस और राजस्व विभाग से शिकायत करने के बाद भी समाधान न होने पर उन्होंने जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाई।

सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत, जनसुनवाई में पहुंचा मामला

जनसुनवाई में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला भी पहुंचा। राजेश मीणा ने ग्राम गुनगा स्थित शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और मुरम खनन किए जाने की शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि पूर्व में शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने संबंधित लोगों पर धमकाने के आरोप भी लगाए।

नोटिस दिए बिना बंटवारे का आदेश जारी करने का आरोप

वहीं बैरसिया तहसील के कोलुखेड़ी निवासी रमो बाई ने राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें और उनके अधिवक्ता को बिना सूचना दिए भूमि बंटवारे की प्रक्रिया पूरी कर आदेश जारी कर दिया गया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और रास्ता बंद करने की शिकायत

इधर ग्राम खजूरी खुर्द निवासी संजय कुमार जैन और सीमा जैन ने शासकीय निस्तार भूमि पर अतिक्रमण कर सार्वजनिक मार्ग बंद किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि रास्ता बंद होने से उनकी कृषि भूमि तक पहुंच प्रभावित हो रही है और खेती-किसानी का कार्य बाधित हो रहा है। शिकायतकर्ताओं ने विरोध करने पर जातिसूचक और अपमानजनक व्यवहार किए जाने का आरोप भी लगाया है। जनसुनवाई में सामने आए इन मामलों ने एक बार फिर भूमि विवादों, अतिक्रमण और राजस्व प्रकरणों के निराकरण में हो रही देरी को उजागर किया है। अब शिकायतकर्ताओं की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।