राजनीति

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16 नगर निगमों में अटकीं वरिष्ठ पार्षदों की नियुक्तियां, विश्वविद्यालय कार्यसमिति और महाविद्यालयों में जनभागीदारी भी अधर में

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भोपाल। मध्यप्रदेश के 10 प्राधिकरणों, 8 निगमों सहित कुल पांच दर्जन से अधिक पदों पर नियुक्तियों के बाद लगभग एक महीने से राजनीतिक नियुक्तियों का क्रम थम गया है। मध्यप्रदेश के 16 नगर निगमों में वरिष्ठ पार्षद, विश्वविद्यालयों में कार्यसमिति और महाविद्यालयों में जनभागीदारी समितियां गठित नहीं हो सकी हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर के कई कार्यकर्ता इन नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में निगम-मंडल, प्राधिकरण और आयोगों में नियुक्तियों से पहले प्रदेश के 169 नगर पालिका और नगर परिषदों में 768 वरिष्ठ पार्षदों की नियुक्ति की गई। इसके बाद निगम-मंडलों में नियुक्तियां शुरू की गईं। अधिकांश प्राधिकरणों में अभी सिर्फ अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष तक की नियुक्तियां ही हुई हैं। इनमें सदस्यों की नियुक्तियां अभी शेष हैं। इसी प्रकार अधिकांश निगम-मंडलों में सिर्फ अध्यक्ष ही नियुक्त किए गए हैं। इनमें उपाध्यक्षों की नियुक्तियां शेष है।  

क्षेत्रीय और सामाजिक समन्वय से हुई नियुक्तियां 

भाजपा ने प्रदेश स्तर की राजनीतिक नियुक्तियों में क्षेत्रीय और सामाजिक समन्वय का विशेष ध्यान रखा है। प्रदेश के सभी अंचलों को समाहित कर हुई नियुक्तियों में अजा, अजजा, ओबीसी ओर समान्य वर्ग को भी समाहित किया गया है। नियुक्तियां प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं के आपसी समन्वय और सहमति के बाद की गई हैं। इसलिए नियुक्तियों के बाद किसी भी तरह के विरोध की बात सामने नहीं आई। 

‘शासी निकायों, निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों का क्रम जारी है। अधिकांश निगम-मंडल, प्राधिकरणों में नियुक्तियां हो चुकी हैं। शेष नियुक्तियां भी शीघ्र ही होंगी।’

हेमंत खंडेलवाल

प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा