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डॉ. मुखर्जी की जयंती पर आज निकायों में होंगी विचार गोष्ठियां,पौधरोपण, मुख्यमंत्री ने महापौर और नपा अध्यक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की चर्चा
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भोपाल। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर 23 जून से 6 जुलाई तक पखवाड़े के रूप में मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों और आयोजनों से पहले सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नगर निगमों के महापौरों और नगर पालिका अध्यक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुडक़र चर्चा की और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा समझायी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 23 जून से 6 जुलाई तक प्रदेश के नगरीय निकायों में युवा सम्मेलन, निबंध प्रतियोगिता और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि नगरीय निकायों द्वारा मार्गों और उद्यानों का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जा सकता है। इससे नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोडऩे का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जीवन राष्ट्रीय एकीकरण के लिए समर्पित रहा।
डॉ. मुखर्जी का बलिदान राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का निधन 23 जून 1953 को हुआ जिसे राष्ट्रहित में दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान के रूप में देखा जाता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विशेष व्यवस्था के विरोध में आंदोलन किया था। उनका बलिदान राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक माना जाता है। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था। डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से 6 जुलाई तक प्रदेश में विशेष पखवाड़ा आयोजित किया जाए। इसके अंतर्गत श्रद्धांजलि कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठियां आयोजित की जाएं।
युवा पीढ़ी को करें राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी शिक्षाविद, चिंतक, सांसद और दूरदर्शी राजनेता थे। उनकी जयंती युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करने का अवसर है। पखवाड़े का समापन उनके विचारों के व्यापक प्रसार के साथ किया जाए। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य इसी विचार को जन-जन तक पहुंचाना हो। इस प्रकार की पहल के लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन, आवश्यक रूप से किया जाए तथा सक्षम स्तर से सभी स्वीकृतियां अवश्य ली जाएं। पखवाड़ा जनसेवा का अभियान होना चाहिए। पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं।
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