राजधानी

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फिजिक्स वाला पर 2 लाख अर्थदण्ड, अन्य को नोटिस, भोपाल जिला प्रशासन शुरू करेगा कोचिंग सेंटरों में जांच, निगम के दकमल टीम को मिली कमियां

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भोपाल। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोचिंग सेंटर में आग से 15 विद्यार्थियों की मौत के बाद भोपाल जिला प्रशासन एक बार फिर से जाग गया है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देश पर टीम गठित कर एमपी नगर सहित शहर के अलग-अलग स्थानों पर स्थित कोचिंग सेंटरों में जांच-पड़ताल शुरू की जाएगी। इससे पहले बुधवार को नगर निगम दस्ते ने एमपी नगर क्षेत्र के कोचिंग सेंटरों पर पहुंचकर सुरक्षा मानकों सहित अन्य कमियों की जांच की। बिना अनुमति के होर्डिंग लगाने सहित अन्य कमियों के चलते एमपी नगर स्थित ‘फिजिक्स वाला’ कोचिंग संचालकों पर 2 लाख रुपये का अर्थदण्ड लगाया है। वहीं कोचिंग सेंटरों और संस्थानों पर भी नोटिस एवं अर्थदण्ड की कार्रवाई की। 

दमकल अधिकारी सौरभ पटेल के नेतृत्व में गठित निगम की टीम ने बुधवार को राजधानी के एमपी नगर क्षेत्र के कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा से संबंधित जांच पड़ताल की। जांच में 40 कोचिंग सेंटरों में वेंटिलेशन की कमी, आपातकालीन निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था और जरूरी दस्तावेजों का अभाव जैसी गंभीर कमियां देखने को मिलीं। कई कोचिंग संचालकों ने बिना अनुमति के असुरक्षित होर्डिंग्स भी लगाए। इस कारण इन्हें नोटिस जारी कर अर्थदण्ड भी लगाया गया। 

कोचिंग सेंटरों में मिलीं यह कमियां

निगम अमले के निरीक्षण के दौरान सामने आया कि कई कोचिंग सेंटरों में फायर सिस्टम लगा हुआ और चालू स्थिति में है। हालांकि इसके बावजूद वेंटिलेशन और सुरक्षित निकासी मार्गों की कमी को गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। दमकल अधिकारी श्री पटेल के अनुसार निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। 

- कलेक्टर के निर्देश पर संयुक्त जांच दल गठित 

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देश पर अपर कलेक्टर ने एम.पी. नगर क्षेत्र स्थित कोचिंग संस्थानों के निरीक्षण एवं सुरक्षा मानकों के परीक्षण के लिए एक संयुक्त जांच दल गठित किया है। अनुविभागीय दण्डाधिकारी (नजूल) एम.पी. नगर के नेतृत्व में गठित इस दल में नगर निगम भोपाल के अग्निशमन अधिकारी, विद्युत सुरक्षा विभाग के अधिकारी तथा सहायक पुलिस आयुक्त, क्षेत्रीय भोपाल को सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। 

प्रशासन का संयुक्त जांच दल कोचिंग संस्थानों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता एवं कार्यशीलता, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं, भवनों की संरचनात्मक मजबूती, वेंटिलेशन, आपातकालीन निकास मार्गों तथा भीड़ प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण करेगा। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की कमी पाए जाने पर संबंधित संस्थानों को आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के पालन के निर्देश भी दिए जाएंगे।

बड़ी घटनाओं के बाद ही यह सक्रिय क्यों? 

देशभर में कहीं भी जब अग्रिकांड, जल भराव अथवा अन्य कारणों से होने वाली घटनाओं के बाद ही भोपाल जिला प्रशासन हर बार इस तरह के अभियान की घोषणा करता है। हालांकि एक-दो दिन की औपचारिकता के बाद प्रशासन पूरी तरह मौन नजर आता है। नियम विरुद्ध कोचिंग संस्थान, अस्पताल, विद्यालय, महाविद्यालय जिन बहुमंजिला इमारतों और तलघरों में संचालित हैं, वहां न तो अग्निसुरक्षा के प्रबंध है, और न ही जल निकासी जैसी आपदा से बचने के उपाय है। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2024 में नई दिल्ली के ओल्ड राजेन्द्र नगर में तलघर में संचालित एक कोचिंग में पानी भर जाने से तीन छात्रों की मौत हुई थी। इसके बाद भी भोपाल जिला प्रशासन ने इसी तरह का अभियान चलाया था। लेकिन वह अभियान भी दो दिन की औपचारिकता तक सिमटकर रह गया था।