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संविधान हत्या दिवस पर यंग थिंकर्स फोरम ने आयोजित किया व्याख्यान, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण कालखंड था आपातकाल: पाण्डेय

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भोपाल। यंग थिंकर्स फोरम ने संविधान हत्या दिवस के उपलक्ष्य में गुरूवार को व्याख्यान आयोजित कर आपातकाल के ऐतिहासिक, संवैधानिक एवं राजनीतिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। काय्रक्रम के मुख्य वक्ता पूर्व न्यायाधीश अशोक पाण्डेय रहे। 

श्री पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद विपक्षी दलों, छात्र संगठनों एवं विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से इस्तीफे की मांग की थी, किंतु 16 जून 1975 को उन्होंने त्यागपत्र देने से इनकार कर दिया। 23 जून को न्यायालय द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश में प्रधानमंत्री को संसद में बने रहने की अनुमति तो दी गई, किंतु मतदान के अधिकार पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद 25 जून 1975 को रामलीला मैदान में आयोजित सभा में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सरकारी कर्मचारियों से संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहने का आह्वान किया।

आपातकाल में स्वतंत्रता पर लगे व्यापक प्रतिबंध 

श्री पाण्डेय ने बताया कि जेपी के आह्वान के बाद देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 19 सहित नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए तथा रातों-रात हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। 4 जुलाई 1975 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया गया। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों को गिरफ्तार किया गया, जबकि अनेक कार्यकर्ता भूमिगत होकर लोकतंत्र की पुनस्र्थापना के लिए संघर्ष करते रहे। मीसा के अंतर्गत बंदियों को न्यायिक राहत और जमानत से वंचित करने जैसे प्रावधान भी लागू किए गए।

विरोधी आंदोलनों में कई संगठन हुए शामिल 

श्री पाण्डेय ने कहा कि आपातकाल विरोधी आंदोलन में अनेक संगठनों और व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बड़ी संख्या में लोगों ने सत्याग्रह किया, कारावास झेला तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया। देश और विदेश दोनों स्तरों पर आपातकाल के विरोध में जनमत तैयार किया गया। बढ़ते जनदबाव के परिणामस्वरूप अंतत: चुनाव की घोषणा करनी पड़ी और मार्च 1977 में हुए आम चुनावों में जनता ने अपना स्पष्ट जनादेश दिया। चुनाव परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना किसी भी प्रकार के दमन से अधिक शक्तिशाली है।