मध्यप्रदेश

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लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने की कई घोषणाएं, तीर्थ यात्रा के लिए विशेष ट्रेन, मुफ्त उपचार देगी सरकार दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के नाम पर होगी शासकीय भवन, सडक़ और पार्कों की पहचान

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भोपाल। मध्यप्रदेश के लोकतंत्र सेनानियों को राज्य सरकार विशेष ट्रेन से तीर्थ यात्रा कराएगी। शासकीय विश्राम गृहों में वे दो दिन मुफ्त ठहर सकेंगे। दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के नाम पर उनके निवास स्थान के आसपास के शासकीय भवनों, सडक़ों, पार्कों के नाम रखे जा सकेंगे एवं लोकतंत्र सेनानियों और स्वतंत्रता सेनानियों के उपचार की पूरी व्यवस्था मध्य प्रदेश सरकार करेगी साथ ही गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए एयर एंबुलेंस की नि:शुल्क व्यवस्था की जाएगी। यह घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को रविन्द्र भवन में आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के प्रांतीय सम्मेलन में की। 

लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने इस मांग को भी स्वीकारा कि शासकीय कार्यालयों में आवेदन लेकर जाने वाले लोकतंत्र सेनारियों को सम्मान दिया जाएगा और उनकी बात को गंभीरता से सुना जाकर शीघ्र कार्रवाई भी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस के तत्कालीन सत्ताधीशों ने सिर्फ कांग्रेस में शामिल होने की शर्त पर निर्दोषों के साथ अत्याचार किए, उन्हें जेलों में डाला। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों से कहा कि उस दौर में आपके संघर्ष के कारण ही आज लोकतंत्र जिंदा है। कांग्रेस की पांच पीढिय़ों ने लोकतंत्र का सर्वाधिक दुरुपयोग किया। एक परिवार को आगे बढ़ाकर शेष को दबाने का काम किया। 

कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौर में देशवासियों ने आजादी के लिए संघर्ष किया। लेकिन स्वतंत्र भारत में इस प्रकार से लोकतंत्र की हत्या की जाएगी, किसी ने सोचा नहीं था। आपातकाल के समय जेलों में मीसाबंदियों पर अत्याचार किया गया। लोकतंत्र सेनानियों के त्याग के बल पर भी आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम विकसित भारत-2047 का सपना देख पा रहे हैं। 

पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि मध्यप्रदेश में आज लोकतंत्र सेनानियों को 30 हजार रुपए आर्थिक सहायता राशि दी जा रही है। प्रदेश सरकार ने मीसाबंदियों के त्याग को समझा और दिल से उनका सम्मान समारोह आयोजित कराने की शुरुआत की है। अब बंगाल के लोकतंत्र सेनानी और स्वतंत्रता सेनानियों को भी सम्मान मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकतंत्र सेनानियों को प्रमाण पत्र जारी कर कई प्रकार की सुविधाएं दी हैं। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि देशभर के लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर दर्जा मिले और उन्हें मिलने वाली 30 हजार की राशि को आयकर मुक्त कर दिया जाए। 

लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसदकैलाश सोनी ने कहा कि एक शख्सियत ने अपनी जिद के लिए लोकतंत्र को खत्म कर उनके फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले नागरिकों को जेलों में डाला। तत्कालीन समय में 25 जून की रात हुए काले कारनामों को देशवासियों को स्मरण कराने के लिए संविधान हत्या दिवस मानने की शुरुआत की गई। आपातकाल का संघर्ष एक प्रकार से देश की दूसरी आजादी का आंदोलन था। सभी लोकतंत्र सेनानी लोकशाही के संवाहक हैं। 

लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पिताश्री स्वयं मीसाबंदी रहे। उन्होंने मीसाबंदियों की पीड़ा को करीब से देखा है। यह हमारा सौभाग्य है कि आज एक मीसाबंदी का बेटा प्रदेश का मुख्यमंत्री है।

वरिष्ठतम लोकतंत्र सेनानियों का किया सम्मान

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 96 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी लक्ष्मी नारायण पाटीदार और 95 वर्षीय शांति लाल संघवी तथा आपातकाल में भोपाल संभाग के जेल भरो प्रभारी रहे मप्र के पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का शॉल-श्रीफल एवं प्रशस्तिपत्र देकर सम्मान किया। कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभागार में उपस्थित सभी मीसाबंदियों का पुष्पवर्षा कर सम्मान किया। इसके बाद उन्होंने आपातकाल से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक अशोक पाण्डे, भाजपा के पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री माखन सिंह, वरिष्ठ नेता मेघराज जैन, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, विधायक भगवानदास सबनानी और रामेश्वर शर्मा, मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमारिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि व प्रदेश भर के लोकतंत्र सेनानी एवं उनके परिजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरूआत राष्ट्रगीत वंदेमातरम् गायन एवं दीप प्रज्जवल से हुआ। कार्यक्रम के पूर्व राष्ट्रभक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई वहीं कार्यक्रम में आपातकाल पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। 

95 से पहले सम्मान लिए बिना मत जाना

कार्यक्रम के बीच एक पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी के संबोधन के दौरान उस समय ठहाके लग गए, जब उन्होंने कहा कि यहां 95वे साल केऊपर के लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान है और मैं सोच रहा था कि मेरे 95 में और कितने बाकी हैं। उन्होंने मीसाबंदियों की ओर इशारा कर कहा, 95 से पहले मत जाना, यह सम्मान लेकर ही जाओ। श्री सोलंकी के इस संबोधन पर सभागार में खूब ठहाके लगे।