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मुख्यमंत्री बोले- संभावित अल्प वर्षा से निपटने सभी विभाग मिलकर करें तैयारी, पूर्व चेतावनी के लिए बनाए जाएंगे राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड
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भोपाल। संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को चुनौती नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समयबद्ध तैयारी के अवसर के रूप में लें। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसानों को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में इस वर्ष प्रदेश में संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित अन्य संबंधित विभागों की अब तक की पूर्व तैयारियों की समीक्षा बैठक में कही। बैठक में अल्पवर्षा को लेकर सही समय पर निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड बनाए जाने की जानकारी भी दी गई।
बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, मत्स्य पालन राज्य मंत्री नारायण सिंह पंवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
किसान वैज्ञानिक सोच के साथ करें चुनौती का सामना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रदेश का प्रत्येक किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक सोच और उचित तैयारी के साथ करे। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए।
जल्दबाजी में बुआई न करें किसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई नहीं करने के लिए भी प्रेरित किया जाए। खेतों में पर्याप्त नमी आने के बाद ही बुआई की जाए तथा नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
अल्पवर्षा की स्थिति पर सरकार की सतत निगरानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संभावित अल्प वर्षा की स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। सभी संबंधित विभाग पूर्व नियोजित कार्य योजना के अनुसार समन्वित रूप से कार्य करें और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएं।
यह हैं अगले दो वर्षों की तैयारी
प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक स्रोतों का चिन्हांकन एवं टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार कर अमृत 2.0 के अंतर्गत जल प्रदाय योजनाओं का समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की ग्रामवार समीक्षा, बंद/अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत का 90 दिवसीय अभियान चलाया जाएगा। ‘जलाभिषेक 2.0’ अंतर्गत प्रदेश में पुराने तालाबों, बावडिय़ों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं का सर्वे एवं जीर्णोद्धार, वीबीपी रामजी अभिसरण से प्रति विकासखंड न्यूनतम सौ जल संरचनाओं का पुनर्जीवन 2 वर्षों में किया जाएगा। सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम एवं खेत-तालाब निर्माण का मिशन मोड कार्यक्रम चलाया जाएगा। नहरों की सफाई मरम्मत रबी से पूर्व पूर्ण, टेल-एंड तक पानी पहुंचाने की जवाबदेही तय की जाएगी।
बांधों से पहले पेयजल, फिर सिंचाई
जल विद्युत एवं जलाशय प्रबंधन के तहत सभी प्रमुख जलाशयों (इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर, गांधीसागर) के लिए नियम वक्र का कड़ाई से पालन, जल उपयोग की प्राथमिकता दी जाएगी। पहले पेयजल, फिर सिंचाई, फिर विद्युत उत्पादन का स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जा रहा है।
जिलों में इस तरह होंगे प्रयास
- जन-जागरूकता के लिए जनभागीदारी से अभियान चलाए जाएंगे।
- कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट आकस्मिक योजना बनाई जाएगी।
- क्षति सर्वे के लिये राजस्व, कृषि एवं पंचायत अमले का संयुक्त प्रशिक्षण कर क्षति आंकलन प्रणाली का सत्यापन कराया जाएगा, जिससे सर्वे 15 दिवस में पूरा हो सके।
- फसल बीमा का कवरेज विस्तार एवं दावा तत्परता से हो, इस संबंध में कार्यवाही की जाएगी।
- आकस्मिकता की स्थिति से निपटने के लिए राज्य की तैयारियां
- राज्य स्तरीय मॉडल आकस्मिक कार्य योजना तैयार कराकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराई गई हैं।
- विभिन्न योजनाओं में फसल प्रदर्शनों, उन्नत फसल किस्मों के बीज वितरण के लक्ष्य जारी किए।
- वर्षा जल संरक्षण के लिए जिलों के बलराम तालाब के लक्ष्य जारी किए।
- सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों को जागरुक किया जाएगा।
- 26 से 30 जून की अवधि में आयोजित ग्राम सभाओं में आकस्मिक कार्य योजना की चर्चा की गई।
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