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भीमनगर बस्ती से होगी पुनर्वास की शुरूआत
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कागजों में तैयार झुग्गी मुक्त राजधानी की कार्ययोजना
भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल को झुग्गी मुक्त बनाने की कार्य योजना पर विगत करीब एक साल से काम चल रहा है। जिला प्रशासन अब तक कागजी कार्यवाही तो पूरी कर चुका है, लेकिन अतिक्रमित शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने अथवा झुग्ग्यिों के विस्थापन की शुरूआत अभी नहीं हो सकी है।
उल्लेखनीय है कि भोपाल को झुग्गी मुक्त बनाए जाने के प्रयास पहले भी कई बार हो चुके हैं। हालांकि पिछले सभी प्रयास न केवल विफल रहे, बल्कि हर वर्ष शहर की सबसे पॉश और कीमती शासकीय भूमि पर नई झुग्गी बस्तियां विकसित होती गईं। पिछले साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राजधानी को झुग्गी मुक्त बनाने की कार्य योजना पर काम शुरू हुआ। इसके लिए प्रशासन ने निजी सहभागिता से शासकीय भूमि पर बहुमंजिला इमारतें तैयार कर झुग्गी बस्तियों के विस्थापन की योजना तैयार की है। झुग्गी विस्थापन योजना के तहत पहले चरण में चिन्हित झुग्ग्यिों को 9 क्लस्टरों में विभाजित किया गया। इसमें सबसे पहले वल्लभ भवन के आसपास की झुग्गियों का सर्वे पूरा किया जाना था। निजी सहभागिता से इमारत बनाए जाने का काम भी प्रारंभिक तौर पर लगभग 17-18 एकड़ से शुरू होना था। कलेक्टर की उपस्थिति में हुई बैठक में एक सप्ताह में डीपीआर डिजाइन, प्लानिंग पॉलिसी, एस्टीमेट और टेंडर की शर्ते एवं सभी तैयारियां पूरी किए जाने पर निर्णय हुआ था। हालांकि निर्धारित अवधि में ऐसा हो नहीं सका था।
322.71 करोड़ की भूमि पर दोनों झुग्गी बस्तियां
राजधानी में वल्लभ भवन के पास बसी भीमनगर झुग्गी बस्ती 2 लाख 64 हजार 900 वर्गमीटर शासकीय भूमि पर अवैध रूप से बसी है। जिन सात सर्वे नंबरों 1478, 1479, 1480, 1483, 1484, 1485, 1511, पर यह अवैध कब्जा है, उस भूमि की दर 8800 रुपये प्रति वर्गमीटर है, जिसकी कीमत 233.11 करोड़ से अधिक है। इसी प्रकार ईदगाह हिल्स कलेक्ट्रेट के पास स्थित सर्वे नंबरों 105, 106 और 107 की 1.12 लाख वर्गमीटर शासकीय अतिक्रमित भूमि की दर 8 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर से अधिक है और इसकी कीमत 80.60 करोड़ रुपये है। इस तरह दो साल पहले इन दोनों ही झुग्गी बस्तियों की भूमि की कुल कीमत 322.71 करोड़ आंकी गई।
2 हजार एकड़ में फैलीं 388 झुग्गी बस्तियां
रोशनपुरा, बाणगंगा, भीमनगर, विश्वकर्मा नगर सहित 8 झुग्गी-बस्तियां शहर के बीच सबसे महंगे और महत्वपूर्ण स्थानों पर करीब 300 एकड़ में फैली हैं। इनके अलावा संजय नगर, राहुल नगर, दुर्गा नगर, बाबा नगर, अर्जुन नगर, मीरा नगर, पंचशील, नया बसेरा, गंगा नगर, बापू नगर, शबरी नगर, ओम नगर, दामखेड़ा, उडिय़ा बस्ती, नई बस्ती, जैसी कुल 388 चिन्हित बस्तियां शहर में हैं। शहर की करीब 2 हजार एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध गुमटी बस्तियां फैली हैं।
राजनीतिक संरक्षण फली-फूलीं गुमटी और झुग्गियां
राजधानी सहित पूरे मध्यप्रदेश के शहरों में अवैध झुग्गियों को राजनीतिक संरक्षण रहा है। भोपाल में सत्ता और विपक्ष के कुछ चिन्हित राजनेता न सिर्फ वोटों के लालच में बल्कि अवैध मासिक उगाही के फेर में भी झुग्ग्यिों और गुमटियों के संरक्षक बने रहे हैं। गुमटी बसाकर उगाही करने वालों में दो पूर्व विधायक (एक दिवंगत) और एक पूर्व मंत्री सबसे आगे रहे हैं।
‘भोपाल शहर को झुग्गी मुक्त बनाए जाने की कार्ययोजना पर तेजी से काम चल रहा है। पीपीआर तैयार हो चुकी है। जल्द ही विस्थापन का काम भी शुरू होगा।’
कौशलेन्द्र विक्रम सिंह
कलेक्टर, भोपाल
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